भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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'चित्र निरूपण' तथा 'पिण्ड और ब्रह्माण्ड' ।

(१३) अक्षर भगवान्

अरण्यद्वीपमें महाविष्णु सहित

(१२) ब्रह्मरंध्रचक्र

योगमा.

(११) अलखनिरञ्जन

यहां ईश्वर मस्तिष्कके स्थानपर हैं।

(१०) पूर्णगिरि

झांझरी द्वीपमें आद्या और निरञ्जन है।

(९) आज्ञाचक्र

पूर्णगिरि भगवान्का स्थान है।

(८) बलवान्चक्र

सूर्य्य और चन्द्रमा देवता।

(७) विशुद्धशक्तिचक्र

अहम् और सोहम् पुरुष है।

(६) अनाहदचक्र

आदिशक्ति भवानी है।

(५) मनोचक्र

शिव भगवान् पार्वती सहित।

(४) मणिपूरकचक्र

मन स्वयम् निरञ्जन है और निरञ्जन

(३) कुण्डलिनी

विष्णु है।

(२) स्वाधिष्ठानचक्र

विष्णु भगवान् लक्ष्मी सहित।

(१) आधारचक्र

संसारके कारण।

ब्रह्माका स्थान सावित्री सहित।

गणेश देवता शक्ति सहित।

<!-- image: A vertical column of 20 circles, with a bracket on the right side grouping the bottom 10 circles. -->

A vertical column of 20 circles, connected by lines. A bracket on the right side groups the bottom 10 circles, indicating they are part of the 'सप्त पाताल' (Seven Netherworlds).

ये सात नरक हैं और इसमें चौरासी कुण्ड हैं और समस्त पापियोंके निमित्त कष्टका स्थान है।

शेषनाग वाराह। भगवान्। मीन अर्थात् मछली। गऊ।

सप्त पाताल

कूर्म अर्थात् कछुवा