कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 273, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंन कर सकोगे । इस कारण ए मनुष्यों ! यही उत्तम है कि, इस निमाजको तुम लोग अपने २ घरोंमें पढ़ा करो । यह बात तालीम मुहम्मदीमें लिखी है जो चाहे सो देख ले । यह पुस्तक मौलवी अमाउद्दीन रचित है ।
अब जानना चाहिये कि, यह वही निमाज और कलमः है जिसके विषयमें कबीर साहबने मुहम्मद साहबको मना किया था कि, किसीपर प्रकट न करना । स्वयम् मुहम्मदसाहब भी इसको गुप्तरीति से पढ़ा करते थे । इस कलमेकी खबर किसी मुसलमानको तनिक भी नहीं है ।
इस तेजोमय पुरुषको, जिसने मुहम्मद साहब को सत्पुरुषका दर्शन करवाया और पाँच कलमा पढ़ाकर पुनः मक्केमें पहुँचाया, जो पहचानेगा सो मुक्ति पावेगा । सो मनुष्य उस सत्यगुरुको पहचानता है उसमें फिर किसी प्रकारकी बुराई नहीं रह जाती है । वह कदापि किसी प्रकार किसी जीवको दुःख नहीं पहुँचाता और न किसी प्रकार किसीको कष्ट पहुँचने देता है, वह सबपर दयालु होता है ।
उनतीसवाँ प्रकरण ।
नवा बर प्रगट होकर इबराहीम अधम सुलतानको शिक्षा देने और शिष्य करनेका वृत्तान्त ।
इब्राहीम अधम बादशाह बलखको बोध करनेका वर्णन सुलतान बोध नामक ग्रन्थमें है जो बोधसागरमें श्रीवैकटेश्वर प्रेसमें छप चुका है । यहाँ पर स्वामी परमानन्द ने उसका विस्तारसे वर्णन नहीं दिया है, इसका कारण यह है कि, आगे इसी ग्रन्थके दूसरे भागमें इनका वृत्तान्त विस्तारसे लिखा है । यद्यपि कितने संत महात्माओंका कहना है कि, यहाँपर भी ग्रन्थोंका प्रमाण देना चाहिये किन्तु, जब आगे विस्तारसे कथा आती है तब यहाँ विशेष लिखकर ग्रन्थ बढ़ाना उचित न समझ कर, इतनी सूचना देनाही अलम है । पाठक दूसरे भागमें देख लेवें । वहाँ विस्तारसे कथा है । यों तो बल बोधकी रमैनी, निर्भय ज्ञान आदि ग्रन्थोंमें भी बहुत रोचक और उपदेशप्रद रीतिसे सुलतान इब्राहीमकी कथा लिखी हुई है ।
तीसवाँ प्रकरण ।
दशवीं बेर कबीर साहबका काफिरिया देशमें प्रगट होना और उस देशके काफिरोंको समझाने तथा शिक्षा देनेका वृत्तान्त ।