भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 311

इन्द्रियजित कबीर सत्यनामके बलसे निभंय होकर मंगल गारहे थे । यह तमासा शाह सिकन्दर तथा दूसरे लोग देख रहे थे । सबी धन्य कबीर ! धन्य कबीर ! कहने लगे इससे शेखतकीके दिलमें शोक हुआ । वो हाथ मलने लगा मुंहसे बात नहीं आती थी । सिकन्दर बादशाहने जोरके साथ शेखतकीसे कहा कि, आप बाँधकर डुबाना चाहते हैं यह निभंय पदका दास कबीर हैं दूसरा कोई नहीं हैं । वैसा मुझको मत समझो, मैं जादू क्या जानूँ मुझे तो केवल साहब नामका जादू है । तब शेखजीने कबीर साहबको एक देगमें बंद करके देगका मुँह भली भाँति बंद कर अग्निपर धर दिया और स्वयम् खड़ा हो देगके नीचे अग्नि जलाने लगा उस समय बादशाहने समाचार भेजा कि, पीरजी ! आप किसको आँच दिलाते हैं कबीर साहब तो मेरे पास बैठे हैं । तब शेखने देगका मुँह खोला तो उसको खाली पाया । तब शेखने कहा कि, अब आगसे बचो तब मैं आपपर विश्वास करूँगा । तब कबीर साहबने कहा कि, जो आपकी इच्छा हो-सो करो अब आगमें जला दो । तब शेखजीने बहुतसा काष्ठ भँगाया पीछे कबीर साहबका हाथ पाँव बाँधवा कर आगमें डालदिया उसी समय वह अग्नि बुझकर बिलकुल ठंडी होगई । शेखजी बहुत बल करते रहे पर वह नहीं जले; कबीरसागर नं० ९ के बोध सागरमें लिखा है कि, फिर शेखजी तलवार लेकर अपने हाथसे काटने लगे कबीर साहबके शरीरसे अस्ति इस प्रकार बाहर निकल जाती थी जैसे कि, वायुअथवा खलाके मध्यसे कृपाण निकलपर पार हो जाती है । इस प्रकार कबीरसाहबके शरीरसे पार होकर निकलती और शरीरपर तनिक चिह्न भी नहीं होता था न कोई रोमही मैला हुवा । किन्तु शेखजी मारते २ थक गए । फिर शेखजी आपको कुएँमें डाल दिया उसको इंट तथा पत्थरोंसे भरही रहे थे कि, कबीर साहब शाह सिकन्दरके समीप जा बैठे । तब शाह सिकन्दरने अपने पीरके पास समाचार भेजा कि, पीरजी ! आप किसको कुएँ में बंद कर रहे हो कबीर साहब तो मेरे निकट बैठे हुए हैं । फिर शेखने कबीर साहबको तोपपर बाँधकर उडवायापर तोपमें जल भर गया । फिर हाथीसे कचरवाया किन्तु वह हाथी चीख मारकर भाग गया ये सब लीलाएँ देखकर शाह सिकन्दरने कबीर साहबका बड़ा मान सम्मान किया । आपको अपने साथ लेकर इलाहाबाद गया, गङ्गातटपर बादशाह कबीर साहब और शेख बैठे थे, तब शेखने कहा कि, ऐ कबीर साहब ! गङ्गामें जो मुरदा बहा जाता है उसको आप जीवित करो । तब कबीर साहबने कहा कि, ए मुरदे ! परमेश्वरके प्रभावसे उठ उसी समय वह उठ खड़ा हुआ । कबीर साहबने उस मुरदाको जीवित किया । मुरदेके रूपमें छोटा लड़का था । जब वह जीवित हुआ तब उसका नाम कमाल