कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 315, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंसोहंग । ८-निरञ्जन और माया सोहंग । ९-ब्रह्मा विष्णु और शिव सोहंग । १०-समस्तजीवसोहंग । यह दश सोहङ्ग हैं और समस्त संसार सोहङ्ग है । जिसका गुरु जहाँकी सूचना देगा वह उसी स्थानको पहुँचेगा । यह समस्त जीवोंमें विष्ट हो रहा है समस्त शरीरसे यही शब्द निकल रहा है । और समस्तका निचोड़ तथा सिद्धांत यह है कि, इसके ध्यानसे ज्ञान है और उसहीसे शान्ति है । कबीर साहबने जो दस स्थान प्रगट किये हैं उन दशके निमित्त इस प्रकारकी विद्याएँ कही हैं । देखो ग्रंथ मुहम्मदबुद्धिमें उनके नाम यह हैं-१ शरीअत (व्याय) । २-तरीकत (प्रथा) । ३-हकीकत । ४-मारफत । ५-मरौवहत । ६-ध्यान दोरहियत । ७-जुलकार चन्द्रगी । ८-हुकम मुरतिद । ९-दएनाका । १०-शब्द सार । ये दश प्रकारकी विद्याएँ हैं । जिस किसीको जहाँका ज्ञान देता है, वह उसी स्थानको पहुँचता है । बिना विद्याके कोई पहुँच नहीं सकता जिसके गुरुकी जहाँलों पहुँच है वह अपने शिष्यको वहाँलों पहुँचा सकता है । पुस्तकों द्वारा केवल चार प्रकारकी विद्याओंको मनुष्य प्राप्त कर सकते हैं । कर्म जो है उसकी पहुँच नासूत स्थानपर्यन्त है । उपासना मलकूतपर्यन्त पहुँचाती है । योग जिवरूत स्थानमें स्थित कराता है । जहाँ सहस्र पेंखुडियोंका कमल है, वहाँ अलख निरञ्जन ज्योतिस्वरूप रहता है । निर्विकल्प समाधि लगाकर योगी लोग उसी स्थानपर जा पहुँचते हैं - आगे नहीं । जिसको मार्फतकी श्रेणी प्राप्त हो-उरफानकी विद्याका प्रकाश धारण किए हो वह लाहूत स्थानको जाता है । लोक और वेद द्वारा मनुष्यों के निमित्त ये चार स्थान ठहराए गए हैं । अचिन्त्य द्वीपपर्यन्तको कभी २ कोई २ साधुओंमें से इङ्कित करनेवाले हैं-मनुष्यको इससे पारका समाचार तनिक भी ज्ञात नहीं है । सब व्यर्थही हवाई बांध मुक्तिमार्ग बतलाते फिरते हैं-समस्त धर्मके मनुष्य प्रण रोपते हैं कि, हमारे धर्ममें मुक्ति है, पर कोई कहीं नहीं पा सकता । जिवरूत स्थानमें तीनोंका रचनेवाला रहता है-सब उसीकी वंदना करते हैं-उसीके द्वारा चार प्रकारकी मुक्ति और समस्त स्वर्गोंका सुख प्राप्त करते हैं-इन समस्त स्थानोंमें शारीरिक आनन्द तथा पाशविक कामनाके अतिरिक्त और लोकका समाचार दिया-तब किसीको निश्चय नहीं हुआ । मुग्ध वेद तथा पुस्तकों की लिखावटोंको सत्यमाना, चार प्रकारकी ही मुक्तिको मोक्षमार्ग न जाना, पर कबीर साहब इन चार प्रकारोंकी मुक्तियोंको बन्धन इच्छा हो तो कालपुरुषका महाजाल बतलाते थे, लोगोंका वह पथ छोड़ना तथा इस पथको ग्रहण करना बड़ा दुष्कर हुआ । इस कारण सब आपके वँरी हो, ऐसा वँसा व्यवहार करने लगे । इसी कारण मैं उन स्थानोंको परिलक्षित किया चाहता हूँ जिनसे संसार