भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 339

आजिज से गुनहगार कतारोंको जो तारे ।
चल हंस अचल मोलिदो मावाय हमारे ॥ ८ ॥

अध्याय ६.

कबीर साहबकी कुछ लीलाएँ ।

कबीर साहबकी लीलाएँ असीम तथा अनन्त हैं, जिनका कि विवरण किसी प्रकार किया नहीं जा सकता । क्योंकि, जब जब सृष्टि होती है तब तब कबीर साहब पृथ्वीपर प्रगट होते हैं, लोगोंको शिक्षा देनेके लिये कौतुक दिखलाते हैं, सत्ययुग त्रेता द्वापर और कलियुग इन चारों कालोंमें आपकी लीलाएँ एक तरहकी प्रगट होती हैं, उनकी गणना कौन कर सकता है, आप उत्पत्तिके आरंभसे महा प्रलयपर्यन्त मनुष्योंको सिखलाते और शिक्षा देते रहते हैं, अगणित लीलाएँ आपसे प्रगट होती हैं, प्रत्येक स्थानपर जा जाकर आप पुकारते हुए मनुष्योंको शिक्षा देते फिरते हैं, कोई कोई भाग्यवान् मान लेता है, नहीं तो प्रायः लोग आपकी बातों को सुनकर घृणा करते हुए भागते हैं । क्योंकि, समस्त मनुष्योंकी बुद्धिपर कालपुरुषने ताला चढ़ा रखवा है, इस कारण सत्यगुरुकी बातोंको कोई २ पसंद करता है । कालपुरुषका विष सबमें प्रवेशित हो रहा है । जैसे नीमके कीड़ेको नीमही पसंद है । मिश्री तथा चीनी उसके दक्किर नहीं होती । न नीमके अतिरिक्त और किसी वस्तुसे उसकी तृप्ति होती है । सहस्रों लीलाएँ देखते हैं, तो भी उनको विश्वास नहीं होता । समस्त कालोंमें जो लीलाएँ आपसे होती हैं, उनको लिखनेवाला कोई नहीं है । यदि समस्त समुद्रोंकी मसि बनावे, समस्त पृथ्वीका कागज करे, समस्त वृक्षोंकी कलमें हों, समस्त देवतागण लिखें तो कदाचित् कुछ लिख सकें तो लिख सकें । मुझसे तुच्छ मनुष्यमें क्या सामर्थ्य है कि, लिख सकें । क्योंकि, वह समस्त जगतका रचयिता और समस्त लोकोंका मालिक है । समस्त परमेश्वरोंका परमेश्वर है । उसके सामनेकी लीलाओंकी क्या गणना है ? जो समस्त महामान्योंका महामान्य है उसकी लीलाका विवरण व्यर्थ है । फिर भी अपने पाठकगणोंके मनोविनोदके लिये कुछ कौतुक नीचे लिखता हूँ ।

गरीबदासजीकी बाणी इत्यादिमें लिखा है कि, सम्मन नामका एक भक्त था । कबीर साहब शेख फरीद और कमाल सहित उसके घर गये उस समय सम्मनके घरमें भोजनके लिये कुछ नहीं था । सम्मनकी स्त्रीका नाम नेकी और पुत्रका नाम सीब था । सम्मनने अपने पुत्र और पत्नीसे परामर्श किया कि,