कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 363, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंअनुवाद—जलमें विष्णु, स्थलमें विष्णु, पर्वतकी चोटीपर विष्णु, अग्नि इत्यादिमें विष्णु है । इस तरह समस्त जगत् विष्णुसे पूर्ण हो रहा है ।
धर्मशास्त्रसे प्रगट है । यद्यपि ऋषीश्वरोंने देवताओंको शाप देकर दुःखी किया, तो भी वेदोंका वचन है कि, विष्णुकी दयाके बिना किसीकी मुक्ति नहीं होती जैसा कि, यह श्लोक है—
मोक्षस्तु विष्णुप्रसादमन्तरा न लभ्यते ।
विष्णुकी दया बिना किसीकी मुक्ति नहीं होता ।
इस श्लोकसे यह तात्पर्य निकलना चाहिए कि, विष्णु सत्तागुणरूप है । बिना सत्तोगुणी युक्ति ग्रहण किए किसीको मुक्ति नहीं होती ।
चारों वेद इस विष्णुकी प्रशंसा किया करते हैं । चारों प्रकारकी भक्ति इसी विष्णुकी कृपा तथा अनुग्रहसे प्राप्त होती हैं। जैसा कि, ऋग्वेदका ये मंत्र हैं—
अतो देवा अवन्तु नो यतो विष्णुविचक्रमे ॥
पृथिव्याः सप्तधामभिः ॥ ऋग्वेद १-२-७-१ ।
अनुवाद— हे देवो । विष्णु सब स्थानोंपर उपस्थित है, उस परमश्वरने समस्त जीवोंको पाप पुण्य भोगने एवं समस्त पदार्थोंके ठहरनेके लिए पृथ्वीसे लेकर नीचेके सात प्रकारके धाम यानी भुवन बनाये एवं ऊपरके भी सात भुवन बनाए इसी तरह गायत्री, आदि सात छंदोंको विद्या सहित बनाया । उन लोगोंके स्थान ईश्वर वर्तमान था । जिस बलसे समस्त लोकोंको रचा है, इसी बलसे हम लोगोंकी रक्षा करता है । इसी कारण ऐ बुद्धिमानो ! तुम लोग हमारी रक्षा करते हुए इस विष्णुकी उपासना करो । वह विष्णु कैसा है ? जिसने बड़े भारी मेदिनीमण्डलको रचा है । उसकी सदैव बंदना करो । १-२-७-१ ।
विष्णोः कर्माणि पश्यत यतो व्रतानि पश्यशे ।
इन्द्रस्य युज्यः सखा ॥ ऋग्वेद-१-२-७-४ ।
अनुवाद—ऐ मनुष्यो ! विष्णु व्यापक ईश्वरके कई सुंदर संसारोंकी उत्पत्ति स्थिति और विनाश कर्मोंको तुम देखो । १-२-७-४
प्रश्न—हम यह किस प्रकार जानें व्यापक विष्णुके कर्म हैं ?
उत्तर—जिससे ब्रह्मचर्य सत्यभाषण इत्यादि व्रत बनाये गये हैं ईश्वरके जिन नियमोंके अनुष्ठान करनेसे हमलोग मनुष्यके शरीरको पानेके लिये समर्थ हुए हैं ये कार्य इसीके बलसे हैं । क्योंकि, इन्द्रियोंके साथ कर्ता भोक्ता जो जीव है उसका वही एक योगमंत्र है दूसरा कोई नहीं है कारण कि, ईश्वर जीवका अन्तर्यामी है, सिवा उसके और कोई जीवका हितकारी नहीं हो सकता, इस