कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 435, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंबाब-ईस् योहन्नासे बपतिस्मा पाकर बाहर निकला । देखो उसके निमित्त आकाश खुल गया । उसने परमेश्वरकी आत्माका कबूतरके समान उतरते हुए अपने ऊपर आते देखा । (४) ईसू उस समयसे हाँक लगाने लगा । जब ईसू जलील नदीके किनारेपर चला जाता था तब उसने दो भाई शमऊन पितरसने उसके भाई इन्दरयासको नदीमें जाल डालते देखा । कारण यह कि, मछुवे थे । उन्हें कहा कि, तुम मेरे पीछे आओ कि, मैं तुम्हें मनुष्योंका मछुवा बनाऊँगा । व उसी समय जालोंको छोड़कर उसके पीछे हुए । (५) बाब (१७) आयत, यह मत ससझो कि, मैं तौरीत या नबियोंकी पुस्तकोंका खण्डन करनेको आया हूँ । मैं उन्हें मिटानेको नहीं बरन् सम्पूर्ण करनेको आया हूँ । (१७) कारण यह कि, मैं तुमसे सत्य कहता हूँ कि, जबलों आकाश पृथिवी टल न जाए तौरी-तका एक बिन्दु अथवा रेखा कदापि नहीं मिटेगी । जबलों सब कुछ पूरा न हो । (७) बाब (१३) आयात, सडकीर्णद्वारसे प्रवेशित हो । कारण यह कि, वह द्वार चौडा है और प्रशस्त है वह पथ जो कष्टपर्यन्त पहुँचता है बहुत हैं वे जो इससे प्रवेशित होते हैं । (१६) वह द्वार क्याही संकीर्ण और तङ्ग है वह पथ जो जीवनको पहुँचाता है अत्यल्प है जो उसे पाते हैं । (८) एक फकियाः ने आकर उससे कहा कि, ए गुरु ! जहाँ तू जावेगा मैं तेरे पीछे चलूंगा (२०) ईसूने उससे कहा कि, लोमड़ियोंके निमित्त माँदे और बायुके पक्षियोंके निमित्त घोसले हैं । पर मनुष्यके निमित्त स्थान नहीं जहाँ शिर धरे (२१) उसके शिष्योंमेंसे एकने उससे कहा कि, ए परमेश्वर ! मुझे बिदाकर कि, मैं अपने पिताको गाड़ूँ (२२) ईसूने कहा कि, तू मेरे पीछे आ । मुरदोंको मुझे गाड़नेदे । (१०) बाब (३४) आयत, यह मत मसझो कि, मैं संसारमें मेल कराने आया हूँ । मेल कराने अथवा शान्ति स्थापन करनेके निमित्त नहीं बरन् मैं असि चलवाने आया हूँ । (११) बाब (२५) आयत, ए पिता ! पृथ्वी तथा आकाशके, मैं तेरा गुणानुवाद करता हूँ कि, तूने उन वस्तुओंको बुद्धिमानोंसे छिपाया, बालकों पर खोल दिया । (१६) बाब (२४) आयत, ईसाने कहा कि यदि कोई चाहे कि, मेरे पीछे आवे तो अपना भाव अस्वीकार करे और अपना सलीब उठाकर मेरे पीछे आवे । (२२) बाब (३२) आयतमें इबराहीमका खुदा इसहाकका खुदा और याकूबका खुदा हूँ । मुर्दोंका खुदा नहीं बरन् जीवितों का खुदा हूँ ।
मरकसकी इञ्जीलका—१२- बाब (३८) आयत एक मनुष्यने मसीहसे आनकर कहा कि, ए भले गुरु ! मैं कौनसा उपाय करूँ कि, सर्वेक