भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 437

अनागतवक्ता (रसूल अल्ला) के कृत्य ।

१० बाब ९ आयत पितरस दो पहरके समीप कोठेपर परमेश्वरकी बंदनाको गया वहाँ उसको भूख लग रही थी, चाहा कि, कुछ भोजन करें पर जब वे प्रस्तुत कर रहे थे, वह विह्वल हो पड़ा देखा कि, आकाश खुल गया वस्तु बड़ी चादरके सदृश जिसके चारों कोने बँधे थे, पृथ्वीकी ओर लटकाई हुई उसके समीप उत्तरी (१२) उसमें पृथ्वीके समस्त रूपके चौपाए, बनलें पशु, कीड़े, मकोड़े दूसरे वायुके पक्षी थे । (१६) उसे एक शब्द सुनाई दिया कि, ए पितरस ! उठ उनको हलाल करके खाजा । (१४) पितरसने कहा कि, ए प्रभु कदापि नहीं, कारण यह कि, मैंने कदापि कोई अशुद्ध वस्तु नहीं खाई है । (१५) दूसरी बार पुनः उसी प्रकार आवाज आई कि, जिसको परमेश्वरने शुद्ध किया उसको तू अशुद्ध मत कह । (१६) यह तीन बेर हुवा तब वह वस्तु आकाशकी ओर खींची गई (१७) जब पितरस चिंतित था कि, यह स्वप्न जो मैंने देखा वह क्या था, उस समय करनीलूस सूबःदारके भेजे हुए तीन मनुष्य आए पितरसको उसके गृहपर लेगए । उक्त सूबेदार अपने कुटुम्बसहित ईसाई हुआ ।

चौथी पुस्तक कुरान ।

ऐसेही तात्पर्य कुरानसे निकलते हैं जो कोई कुरानके वाक्य पढ़नेकी युक्ति जानता हो वाक्य पढ़कर अपना तात्पर्य जान सकता है । यह कुरान स्वयम् प्रगट करता है कि, मैं पूरबकी किसी पुस्तकसे पृथक् किया गया हूँ । सुतरां

सूरए यूंस (الر) यह पक्की आयतें हैं पुस्तककी ।

सुरए यूसुफ-ये आयतें हैं प्रगट पुस्तककी । सूरए हुज्र यह पुस्तककी तथा खुली कुरानकी आयतें हैं । सूरतशशोरा आयतें हैं खुली पुस्तककी । सूरत

लुकमान (١٠ ال) ये आयतें हैं पक्की पुस्तककी । इसी प्रकारके अनेकों स्थलोंमें यह बात पाई जाती है ।

अल्लोपनिषद् ।

कोई इसे अकबरके समयकी कल्पित बताते हैं इसके विषयमें अनेक तरहकी किंवदंतियाँ हैं । मनुष्य अपनी बुद्धिसे विचारले अथर्व वेदमें तो हमें