भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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हार सिखानेवाले चौथे गुरु हैं । पाँचवे गुरु वे हैं जिन्होंने वैष्णव बना राम नामका मंत्रका सुमिरन देकर भगवान्की ओर लगाया । भ्रमदुर्गके तोड़ने वाले छठे गुरु हैं । जिन्होंने दुविधा मिटाकर एकसे नेह लगवा दिया । सातवे वे गुरु हैं जो शब्द लिखा दिया जिससे यथार्थ तत्त्व जान उस तत्त्वमें निमग्न हो गया अथवा संसारका तत्त्व लेकर इसे जैसेका जैसा दिखा दिया । मैं जहाँसे आया था वहीं जा दाखिल हुआ । कबीर साहिबका कथन है कि, दुनियाँमें सात गुरु हैं सारा संसार इन्हींका सेवक है । सतगुरु या सातवों उसीको समझिये जो भवसागरसे पार लगादे । कानफूका तो हृदका गुरु है । बेहद (ब्रह्म) का नहीं । जब बेहदका गुरु मिल जाता है उस समय वो औरका और ही हो जाता है । संसारीका असंसारी एवं अल्पज्ञका सर्वज्ञ बन जाता है ।

जो शिष्य होना चाहे वह पहले भली भाँति जाँच करे । जो कोई बिना जाँचे गुरु करता है वो बिगड़ता है । अँधेरे कुएमें गिरता है ।

अंधोंका पन्थ ।

एक अंधा पुकार पुकारकर कह रहा था कि, मुझको सातों आकाश और वैकुण्ठ सब कुछ दिखाई दे रहा है । उसके पास एक मनुष्य खड़ा था । वह अंधेसे कहने लगा कि, ए भाई ! मुझे भी वह आकाशका मार्ग बता ? अंधेने कहा कि, तूभी आँख फोड़वावे तो तुझको भी दिखाई देने लगे । उसके कहनेसे अपनी आँखें फोड़वाई । उसकी आँखें फुट गईं तब उसने कहा कि, मुझे तो कुछ भी दिखाई नहीं देता । तब पहलेके अंधेने उसे सिखाया कि, तू भी मेरी तरह कह । वह भी उसी प्रकार कहने लगा कि, मुझे समस्त स्वर्ग दिखाई देते हैं । मेरी भीतरकी आँखें खुल गईं । तब इन दोनोंकी बातें सुनकर एक तीसरेने भी अपनी आँखें फोड़दी । फिर चौथे पाँचवने आँखें फोड़वाईं । जो कोई आँखें फोड़वाता उसको पहलेका अंधा सिखा देता कि, जैसे मैं कहता हूँ इसी प्रकार तू भी कह । वह भी वैसाही कहने लगता था । तात्पर्य यह कि, बीस तीस मनुष्योंने मिलकर अपनी आँखें फोड़वालीं । तब एक और मनुष्य आया उसने भी अपनी आँखें फोड़वाईं और जब उसको कुछ दिखाई नहीं दिया तो उसने कहा कि, मुझको तो कुछ दिखाई नहीं दिया ? तब पहलेका अंधा उसको सिखलाने लगा कि, तूभी इसी प्रकार कह जैसे कि, हमलोग कह रहे हैं । उसने कहा कि, मैं ऐसा कभी भी न करूँगा । दूसरे अंधोंसे पूछा कि, तुमको क्या दिखाई देता है ? सबोंने कहा कि, हम सबने इस पहलेके अंधेके कहनेसे अपनी आँखें