भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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तीसरे भागमें केवल एकही अध्याय है। जिसमें विषयवासना और मनके कृत्योंका वर्णन है।

चौथे भागमें भी एकही अध्याय है—जिसमें जीवोंके चौरासी लाख योनियें भ्रमण करने अर्थात् आवागमनका वर्णन है।

पाँचवें भागमें एकही अध्याय है जिसमें प्रत्येक मजहबों (पंथों) पर व्याख्यान (लेकचर) है।

छठे भागमें चार अध्याय हैं। १ पहले अध्यायमें—जगतके मिथ्या होनेका वर्णन है। २ दूसरे अध्यायमें—संसारसे घृणा और वैराग्यका वर्णन है। ३ तीसरे अध्यायमें—बुद्धि विचार, विवेक, एकैईश्वरवाद तथा मालिक पर भरोसा (विश्वास) का वर्णन है। ४ चौथे अध्यायमें—मनन और निदिध्यासन का वर्णन है।

सातवें भागमें एकही अध्याय है जिसमें शिष्य और गुरुके प्रश्नोत्तर हैं। इसमें शिष्यमुखके १२५ प्रश्न और गुरुमुखसे उनका उत्तर वर्णित है।

आठवें भाग में भी एक ही अध्याय है जिसमें हानिकारक निषेध वस्तुओं का वर्णन, उनसे हानि उनके त्याग से लाभ आदि का वर्णन करके, मानवधर्मके नियम (पटल) को लिखा है अन्तमें कबीरमन्शूरका उपसंहार, ग्रन्थसमाप्ति की प्रार्थना और समाप्ति की तिथि सन सम्बत् आदि का वर्णन है—यह ग्रन्थ मार्च १८८१ ई. में छपा गया था—कोहिनूर प्रेस लाहौर में छपा था।

तालीम कबीर कलियुग

स्वामी परमानन्दजी साहब अपने तीसरे ग्रन्थ "तालीमकबीरकलियुग" की भूमिकामें इस प्रकार लिखते हैं—

इस किताब "तालीम कबीरकलियुग" लिखनेकी यह वजह है कि, इस किताबके पहले इस फकीरने दो किताबें लिखी, १ एक का नाम कबीरभानु-प्रकाश, २ दूसरेका नाम कबीरमन्शूर। इन दोनों किताबोंमें फकीरने नानक शाह साहबको कबीर साहबका चेला लिखा, इस बातपर वे लोग जो इन दिनोंमें आपको नानक साहबके पैरू (अनुयायी) समझते हैं, नाराज हुए, बावजूदकि (यद्यपि) फकीरने उनको समझाया कि, मैं अपनी तरफसे यह बात नहीं समझता बल्कि जो कुछ कबीरसाहब और नानक साहबके तहरीर (लिखे हुए) व

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