भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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गुरुका देश न्यारा है, वहाँ जो कोई जाता है अमर हो जाता है । वह अजर अमर घरमें जाकर रहता है । फिर भवसागरमें कभी नहीं आता ।

जब इतनी बात लोगोंने कही तब राजाके मनमें सोच समझ आई । उक्त राजा सत्यगुरुके चरणोंपर गिरा । सत्यगुरुने दया करके इस राजाको अपनी दीक्षा दी उक्त राजाके साथ नौलाख मनुष्य सत्य सुकृतजीके शिष्य हुए । सब पर सत्यगुरुकी कृपा दृष्टि हुई । राजाका अंतःकरण शुद्ध हो गया अपनी समस्त रानियों तथा पुत्रोंसहित सत्यगुरुके चरणोंमें लग गया । इस राजाका पिता जो मरकर हाथीकी देहमें था उसपर भी सत्यगुरुकी कृपा हुई, वह भी श्रेष्ठ तथा प्रतिष्ठित हुआ । सबोंने परम शुद्धताको प्राप्त कर मुक्ति पाई । राजा कनक हाथीके शरीरसे छुटकारा पाकर सत्यगुरुका अनुगृहीत हुआ । यह बहुत बड़ा राजा था उसके पास लाखों सिपाही सोलह सहस्र बौद्धियाँ और अठारह सहस्र हाथी थे । राजा रानी इत्यादिने सत्यगुरुकी दीक्षा पाई । सत्यगुरुने उनके शिरपर हाथ रखा तब सबको अगम ज्ञान हो गया । सब भविष्यकी बातें और तीनों कालका हाल जानने लगे । समस्त संसारके पदार्थोंको तुच्छ तथा नाशमान समझने लगे । यद्यपि उसके अधीन बड़ी सम्पत्ति तथा अतुल वैभव था तो भी उसमें उनकी आसक्ति नहीं थी ।

उस राजाके गृहमें कबीर साहब इसी प्रकार रहे थे कि, जैसे नरहर ब्राह्मण और नीरू जोलाहेके गृहमें रहे थे । वह समय सत्ययुगका था । कबीर साहबका नाम सत्य सुकृतजी प्रसिद्ध था—कबीर साहब इस राजाको इसी प्रकार सिखलाया करते थे, सत्यलोक तथा सत्य पुरुषका समाचार दिया करते थे । यह राजा आपका कहना न मानता था पर था वेदपाठी । वेदकी शिक्षा लोगोंको दिया, करता था । यही कारण था कि, सत्यपुरुष उसके घर आये थे । अन्तमें उसका परिणाम अच्छा हुआ कि, सत्य सुकृतजीके चरणोंमें लग गया इस राजाका विशेष वृत्तान्त ग्रंथ कनकबोधमें देखलो वहीँ सब विस्तारके साथ लिखा है ।

रानी लीलावती और पूर्णवतीके शिरपर जब कबीर साहबने अपना हाथ रक्खा तो उनका हृदय विकसित हो गया, उन्हें अपने पूर्व जन्मकी सुध हो गई । समस्त वृत्तान्त कहने लगीं । इस प्रकार पचास रानियाँसत्य गुरुके देश पहुँचीं । राजा अपनी बौद्धियों सहित सत्यगुरुके शरण आकर सत्यगुरुके देश पहुँचा । जितने लोग सत्यगुरुके शरण आये नेहाल हो गये तथा जो आयेंगे वो निहाल हो जायेंगे ।