कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 651, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंएकादशमा प्रमाण ११ कितनेक कबीर पन्थी विद्वान्, गुणी साधु कहते हैं कि नानकशाह, कबीर साहबके शिष्य हैं । इसमें कोई सन्देहही नहीं है ।
द्वादशमा प्रमाण १२— जब यह फकीर (अर्थात् पुस्तकका रचयिता) सन् १८५२ ई. में अपने गुरु महाराजके साथ था वह भी यही कहा करते थे कि, नानकशाह कबीर साहबके शिष्य हैं अनेक बार उनका विवरण मेरे समक्ष करते थे जिससे मैंने जाना कि, वास्तवमें नानकदेव कबीर साहबके अनन्य शिष्योंमें हैं । अनेक पुस्तकोंमें कबीर साहब तथा नानक साहबका वृत्तान्त लिखा हुआ है । अब मैं इस पुस्तकके अन्तमें (आठवें परिच्छेदके १२२ प्रश्नके उत्तरमें) समप्रमाण और भी लिखूंगा ।
नानकशाह साहबके जन्म साखीकी विशेष बातें ।
यहाँ अब मैं वह बातें लिखता हूँ जिनको स्वयम् नामक साहबकी जन्म साखीसे चुना है । सब जन्म साखियोंमें भाई वालेकी जन्म साखी सर्वोत्कृष्ट तथा बड़ी प्रामाणिक मानी जाती हैं, इसी जन्म साखीको सब मानते भी हैं । नानक साहबके परमधाम सिधार जानेपर भाई बाला गुरु अङ्गदजीके पास गया । अङ्गदजी नेत्रोंमें जलभर कर उससे कहने लगे कि, हे भाई बाला ! आप तो गुरुजीके साथ फिरते रहे हो आपको सब वृत्तान्त अच्छी तरह मालूम है । मुझे सत्यगुरुके भ्रमण तथा घूमने फिरनेका सब हाल कहो । इस बातपर भाई बालाने गुरु अङ्गदजीसे जो कुछ कहा वही बात इस जन्म साखीमें लिखी हुई है । यह जन्म साखी सम्बत् १५८३ विक्रमीकी है जिससे ये बातें लिखी गई हैं । सवाल जवाब पंजाबीमें है उनका साथही साथ अर्थ कर दिया गया है । जन्म साखी २६६ पृष्ठ भाई मरदाना नानक साहबसे प्रश्न करता है कि—
प्रश्न—हे महाराज तू सानू जो गुरु मिलिया सो कौन मिलिया, आहा ते नाम उसदाकी आहा ।
अर्थ—हे महाराज ! तुमे कौन गुरु मिला है, उसका नाम क्या है !
उत्तर—ता फिर नानकजीने कहिया, नाम उसदा बाबा जिन्दा हुआ है, जित्यै तोड़ी पवन और जल है सब उसदे बचन बिच चलदे हैं ।
अर्ध—उसका नाम बाबा जिन्दा है, जहाँतक पवन और जल हैं, सब प्राणी उसकी अज्ञाके बीच चलते हैं ।
फिर देखो (पृष्ठ २२६) भ्रमणके समय एक साधुने नानक साहबसे पूछा कि, तुसाड़ा (अर्थात् तुम्हारा) गुरु कौन है ? तब नानकजीने उत्तर दिया था कि, मेरा गुरु जिन्दा है ।