भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 656

देश करते फिरे । जब सत्यलोकको गये तो वहाँसे कबीर साहबने उन्हें पृथिवी-पर भेज दिया कि, हे नानक ! अभी तुम पृथिवीपर जाओ आप नाम जपो तथा दूसरोंसे जपाओ । नानक साहब सत्यलोकसे पलटे, सत्य गुरुके वचनानुसार पृथिवीपर भ्रमण करते हुए लोगोंको उपदेश करते फिरते थे, उनके साथ भाई बाला और मरदानभी रहा करते थे, अपनी सिद्धिके बलसे दोनोंको अपनेही साथ उडाले जाते थे । नानकशाहसाहबका शरीर दिव्य तत्त्वका हो गया था, वे त्रिगुणातीत हो गये थे, उनको प्यासकी कुछभी चिन्ता नहीं थी । भाई बाला भी भूखका कष्ट सहन कर सकता था परन्तु मरदाना मीरासी (गानेवाला) भूख सहन करनेमें जरा कच्चा था । इस कारण जरासी भी भूख लगनेपर वह भूख भूख करके पुकारता था । एक दिवस वह नितान्तही विवश होकर कहने लगा कि, गुरुजी ! अब आप मुझको विदा कीजिये मैं अपने घरको जाऊँगा क्योंकि, मैं तुम्हारे साथ भूखा मरता हूँ ।

यह देख नानक साहबने उसे समझाया कि, तू घर मत जा, यहाँसे आठ कोसके ऊपर एक कूड़ा राक्षस रहता है, यह प्रायः मनुष्योंको पकड़ पकड़ कर खाता है । तुझको भी खा जावेगा । मरदानेने कहना न मान कर कहा कि, गुरुजी अब मुझे अपने घरवालोंका मोह लगा है, मुझे जाने दीजिये । यद्यपि नानक साहबने कईबार मना किया पर उसने न माना, उनसे बिदा होकर घरको चला । राहमें उसको कूड़ा राक्षस मिला और पकड़ लिया । कड़ाहमें तेल भरकर तपाने लगा जिसमें मरदानेको भूनकर उसमें खाजावे । जब कूड़ेने मरदानेको पकड़ लिया उसने देखा कि, यह तो अवश्यही मुझको भूनकर खालेगा, तब उसने नानक साहबका ध्यान करके कहा कि, गुरुजी ! अब मेरे प्राण बचाओ । मैंने जो आपका कहना न माना उसका फल मुझको मिल गया अब मैं आपकी शरणमें हूँ । अब आपकी आज्ञा कभी अस्वीकार न करूँगा । इस प्रकार उसने विनय की तब नानक साहबने सब कुछ मालूम कर लिया कि, कूड़ेने मरदानेको पकड़ लिया । अब भूनकर उसको खाया ही चाहता है । बालासे कहा कि, हे भाई बाला ! अब वह मुझको इस दुःखमें स्मरण करता है । तब बालेने कहा कि, गुरुजी ! आपने तो उसको बहुत समझाया था परन्तु उसने आपका कहना न माना । अब अच्छा है कि, कूड़ा राक्षस उसको खाजाय जो आज्ञा नहीं मानता उसकी ऐसीही दशा होनी चाहिये । नानक साहबने कहा कि, यह बात अच्छी नहीं, वह तो अब मेरे शरण में है । मैं कैसे उसकी सहायता न करूँ ? उस मरदाना पर दया आई । बालेको अपने साथ लिये एक पलभरमें उसके पास पहुँचे ।