भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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इत्यादि भी पूर्वकर्मानुसार ही प्रगट होते हैं, बहुतेरे चिन्ह छिपे रहते हैं। शिरसे लेकर पैरतक सुकर्म तथा दुष्कर्मके चिन्ह भरे हुये हैं, कहीं दुर्भाग्यके तो कहीं सौभाग्यके चिन्ह होते हैं। यदि एक स्थानपर दुर्भाग्य और दूसरे स्थानपर सौभाग्य का एकही बातपर चिन्ह हो तो उसका मध्यम फल होता है। जो सामुद्रिक जानते हैं ये बातें उनको मालूम होती हैं। सामुद्रिक विद्या अत्यन्त कठिन है। जो सामुद्रिकमें प्रवीणहो वह मनुष्यका आकार देखकर सब कुछ कह सकता है।

कबीर साहबने इस सामुद्रिकके विषयमें बहुत कुछ कहा है कर्मोंके चिन्ह देखकर सामुद्रिकका ज्ञाता सब कुछ कह सकता है। इसी विषयपर एक उदाहरण देता हूँ—मैंने किसी अंग्रेजी पुस्तकमें पढ़ा था कि, हकीम सुकरात एक पाठशालामें अपने शिष्योंको पढ़ा रहे थे। उसमें एक सामुद्रिक जाननेवाला आगया, जब सुकरातके शिष्योंने जान लिया कि, यह पुरुष इस प्रकारकी विद्या रखता है तो उसको वे अपने उस्तादके निकट लेगये और कहा कि, इस पुरुषके दोष और अवगुण कहो। वह सामुद्रिक जाननेवाला इस बातको नहीं जानता था कि, वही हकीम सुकरात है। उस समय उस सामुद्रिकीने सुकरातकी देहके सभस्त चिन्ह देखे पहचानकर बोला कि, यह मनुष्य बड़ा पाजी, दुष्ट व्यभिचारी, झूठा, ठग, दगाबाज और दुष्कर्मों है। यह बातें सुनकर सुकरातके शिष्योंने उसके ठट्ठे उड़ाये हँसते हँसते बोले कि, यह मनुष्य झूठा है। तब सुकरात जो स्वयम् सामुद्रिक विद्या जानता था कहने लगा कि, तुम लोग इसको झूठा मत समझो। यह मनुष्य जो कहता है वह सत्य कहता है। उसमें कोई सन्देह नहीं क्योंकि, उसने जो कुछ कहा उन सब बुराइयोंके चिन्ह मेरे शरीरमें परिलक्षित हैं। मेरे शरीरमें वे सब चिन्ह ज्योंके त्यों बने हुये हैं मेरा स्वभाव वैसेही था परन्तु मैंने अपनी विद्या और योग्यतासे अपनी वासनाओंको भलीप्रकार दमन किया है। अपने हृदयको दुष्कर्मोंकी ओर हिलने नहीं दिया है भली प्रकार दृढ़ कर लिया है जिसमें तनिकभी हलचल न हो। ऐसा वासना दमन किया है कि, वे मूरदेकी तरह होगई हैं। परन्तु ये चिन्ह जली हुई रस्सीकी ऐंठनके समान शेष हैं। तब सुकरातके शिष्योंको निश्चय हुआ कि, हमारा उस्ताद सत्य कहता है, इस प्रकार पुरुषार्थ प्रारब्धपर जय पाता है। मनुष्य के अतिरिक्त कितनेही हाथी, घोड़ा बैल इत्यादि पशुओंमें भी ये चिन्ह देखे जाते हैं कि, जो लोग उनको मोल लेते हैं उनके भले बुरे चिन्होंको पहचान कर दुर्भाग्य तथा सौभाग्य जान लेते हैं। उनके कर्मोंके चिन्ह साधारणतः जड़ स्थावर पदार्थ पर प्रगट नहीं होते, गुप्त रहते हैं, परन्तु कभी कभी किसी चिन्हसे उनके पूर्व जन्मोंका चिन्ह प्रगट होजाता है। सर्व साधारण देखकर जान लेते हैं। सुतरां