भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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मंत्रियों तथा निकटवर्तियोंने मना किया कि, महाराज ! आप इसको मत खाओ क्योंकि, वैद्यने मना किया है पर राजाने कहा कि, मैं खाता नहीं देखता हूँ जब देखा और बास लिया तब राजाके मनमें इच्छा हुई और आमको खागया अमीरों का कहना न माना । दो चार आम जो मनमें आया खालिया और बीमार हो गया । फिर बहुत कुछ औषध की गई पर आरोग्य न हुआ अन्तमें मर करही पीछा छूटा ।

इसी प्रकार सब गुरु मना करते हैं पर विषय वासनाओंसे कोई बच नहीं सकता, इसने सबको मार लिया है । हृदयसे लेकर ये सब बन्धनके कारण हैं, बिना इन सब पर विजय पाये बन्धन नहीं कट सकता ।

अध्याय १८

पुनर्जन्म

भवसागरमें चारों खानके जीव चौरासी लाख योनिमें आवागमन किया करते हैं । इस कारण अब मैं पुनर्जन्मका वर्णन करता हूँ । यह सत्यगुरु कबीर साहब का कथन है कि, सब जीवोंको आवागमन हुआ करता है । समस्त भारतवासी इस बातको स्वीकार करते हैं । कदाचित्ही कोई इस बातको स्वीकार न करे पर मूसई, ईसाई तथा मुसलमान इस बातको नहीं मानते । कोई कोई उनमेंसे भी मान लेते हैं । इस कारण मैं पुनर्जन्मको उनकी पुस्तकोंसे प्रमाणित किया चाहता हूँ जिसमें उनकी अज्ञानता नष्ट हो वे इस बातको मानें । विशेषतः जिस बातको स्वसंवेद स्पष्ट कहता है उस बातके ऊपर शंका करनेवाला सच्चा कैसे ठहर सकता है ?

नज्रम-तनासुख कहें सत्य साहब कबीर ।

मिहर जिसके इनसां हो रोशन ज़मीर ॥

मुकद्दस स्वसंवेद उसका कलाम ।

बर्रा नस्त नामे अलेहुस्ललाम ॥

तीनों धम्मोंके महाशयगण और सिद्ध साधु तथा समस्त पृथिवीके विद्वानों और समस्त पुनर्जन्म न माननेवालों को विदित हो कि, बिना पुनर्जन्मके माने एवं आवागमनके अस्वीकार किये पापोंकी अधिकता और वासनाओं पर कभी भी विजय नहीं पासकते । जीवोंपर दया दृष्टि न होगी, विवेक विचार तथा सोचनेकी बुद्धि न होगी तो बन्ध और कण्ठही रहेगा ।

गज़ल-बकौले सतगुरु सच है तनासुख ।

कि चौरासी करे जीव तँ तनासुख ॥