भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 755

देकर कहा कि, तेरे वंशसे बादशाही विलुप्त हो जायगी क्योंकि, तू यहवाहको छोड़कर अन्यान्य परमेश्वरोंकी पूजा किया करता है ।

सलातीनकी किताबमें देखो । यद्यपि सुलेमान बादशाहको खुदाने दो बार दीदार दिया बरकत देकर कहा कि, ऐ सुलेमान ! मैंने तुझको विद्या, राज्य तथा पैगम्बरी तीनों प्रदान की तुझसा बुद्धिमान् न कभी हुआ न भविष्यमें होगा, न इस समय है । इस सुलेमान को काम क्रोधादिकने ऐसा दबाया कि कितनेही कार्यमें उसने बुद्धिके विरुद्ध किये ।

किताब तोहफतुल इस्लाममें लिखा है कि, एक दिवस सुलेमानके पास बहुमूल्य घोड़े आये उनके विषयमें आपको वार्तालाप करते २ सौझ हो गयी, सूर्यास्त होनेके कारण सौझके समयके निमाजका समय भी जाता रहा । इस बातसे सुलेमानको अत्यन्त क्रोध आगया घोड़ोंकी गर्दन उनके तनसे जुड़ा की । व्यर्थही उन निर्दोषोंका रक्तपात करके अपने हाथोंको निर्दोषोंके रक्तसे रंगा ।

कुरानके सूर : (स्बाद) और हदीसोंमें लिखा है कि, जैदून नामक एक बादशाह समुद्रके टापुओंमें रहता था । उसको मारकर उसकी पुत्री जरावाको सुलेमानने अपनी स्त्री बनाई, वह अपने पिताके शोकमें रोया करती थी, सुलेमानने मूर्ति बनानेके लिये कहा । उस स्त्रीके घरमें वह मूर्ति रखी गई, चालीस दिवस तक बराबर मूर्तिपूजा होती रही सुलेमान तौहीदको छोड़कर बुतपरिस्त हो गया ।

यह भी लिखा है कि, सुलेमान बादशाह एक दिन पायखाने गया (जिसकी बदौलत जिनपरी आदि उसके अधीन थे उस अंगूठी) को अपने गुलामको दे गया, क्योंकि पायखानेके समय उस पवित्र अंगूठीको वह पहनना नहीं चाहता था । इसी अवसरमें एक देव सुलेमानके स्वरूपमें आया उस गुलामसे अंगूठीको लेगया, सुलेमानके सिंहासनपर बैठकर आज्ञा दी कि, मेरे पीछे एकदेव मेरे स्वरूप का आता है वह तुम लोगोंसे कहेगा कि, मैं सुलेमान हूँ, तुम कदापि उसका विश्वास न करना, उसको भलीप्रकार मारपीटकर निकाल देना । इसके पीछे ऐसाही हुआ. सुलेमान जब शौचसे निवृत्त होकर आया तब तो गुलामको उसकी जगह न पाया न वह अंगूठी मिली । अपने मकानमें जाकर अपने को सुलेमान बादशाह कहा, पर उसके सेवकोंने उसको मारकूटकर निकाल दिया । सुलेमान बादशाह मारा मारा फिरने लगा ढाढ़ें मार मारकर रोता था । भूखा फिरा करता था एक स्थानपर गया जहाँ एक मल्लाह मछली मार रहा था । उसने पूछा तू कौन है ? यदि तू मेरी नौकरी करे तो मैं तुझको एक मछली नित्य प्रति खानेको दे दिया करूँगा । सुलेमान मछुवेका नौकर हो गया । एक मछली प्रतिदिवस पाया करता था, उसकी