भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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है, उसके भीतर बहुतेरी गलियाँ (हृदय आदि) हैं उन गलियोंमें फिर्लेंगी । सब गलियोंमें फिरी परन्तु मेरा प्यारा प्रेमी नहीं मिला । बावन जो नाकाबन्दी शब्द आया है उसका तात्पर्य इन्द्रियोंके देवतोंसे है शरीरके भीतर बहुतेरी मूर्तियाँ दिखाई देती हैं वे स्थान स्थानपर शरीरमें स्थित हैं । वे मुझको मिलीं । क्या तुमने उसको देखा जिसे मेरा जी चाहता है वे सब मेरे प्रेमीसे अनभिन्न थे । जब मैं उनसे दुःखी होके आंगे बढ़ी; अर्थात् इन्द्रियोंके देवताओंसे आगेको चली क्योंकि, सब देवता वासनासे भरे हुये हैं—जब तक वासनाका बन्धन है तब तक प्रेमी नहीं मिलता न उससे प्रेम होता है । यही बात कबीर साहिबने भी कहा है कि—

कबीर—जब लगि आशा देहकी, तब लग भगति न होय ।

आशा त्यागी हरि भजे, भगत कहावे सोय ॥

जब वो वासनाओंको छोड़कर आगे चली तब मेरा प्यार मिला, मैंने उसको पकड़ रखा है । उसको न छोड़ूँगी । जब तक कि मैं उसको अपनी माताके महलमें न लेजाऊँ ।

माताका गृह अपना महल गर्भ है अर्थात् जब तक यह मनुष्य माताके गर्भमें नहीं आता तबहीं तक प्यारीका सम्बन्ध रहता है अपने प्रेमीको कदापि नहीं छोड़ता, पकड़ रखता है । परन्तु जिस समय वह वीर्यमें प्रवेश कर माताके गर्भमें जाता है उस समय उसको अपने प्रेमीका तनिक भी ध्यान नहीं रहता । अचेतावस्थामें निर्जीव पदार्थके समान लटकता रहता है जब जब यह आवागमन करता है तब तब अपने प्यारको भूल जाता है जब ज्ञान होता है तो बुरी तरह छटपटाता है ।

१५ बादशाह बनूकदनजरका पशु होना—दानियाल नबीकी पुस्तकके चौथे बाबमें लिखा है कि, एक दिवस बनूकदनजर बादशाह बाबलने अपने मनमें ऐसा घमण्ड किया कि, मैंने इस राज्यको अपने बाहुबल द्वारा लिया है. इस बातसे उसपर खुदाका कोप भड़का, वह मनुष्यसे पशु हो बेलोंके समान घास चरता फिरता था । उसके नख पक्षियोंकी तरह बढ़ गये, उसकी सारी आदतें पशुओंकी उसके वह जीतेजीही पशु होगया । परन्तु उसपर खुदाई दया हुई कि. वह फिर अपने मनुष्यके स्वरूपमें आगया, अपने राजासन पर बैठकर राज्य करने लगा । यह जीवनमें आवागमन देखो, इस बनूकदनजर बादशाह बाबलका वृत्तान्त पढ़कर मनुष्यको आवागमनसे इनकार करना न चाहिये । जो केवल थोडासा घमण्ड करनेसे बेल होगया जो लोग भौतिभौतिकी बुराइयाँ करते हैं उनकी क्या दशा होगी ।

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