कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 781, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंरोंका म लिक आया, उनसे हिसाब लेने लगा । जिसने पाँच तोड़े पाये थे वह उन तोड़ों सहित उपस्थित हुआ कहा कि, ऐ स्वामिन् ! मुझे आपने पाँच तोड़े दिये थे उससे मैंने पाँच और कमाये हैं । मालिकने कहा भले सेवक ! चिरजीवी हो, तू थोड़ेमें भला निकला, मैं तुझे बहुत बड़ा अधिकार दूंगा । वैसाही वह दो तोड़ेवाला भी चार तोड़े लेकर उपस्थित हुआ, मालिकने वही बात उससे भी कही तीसरा जिसको स्वामीने केवल एक तोड़ा दिया था वह वही एक तोड़ा लेकर उपस्थित हुआ कहा कि, हे स्वामिन् ! मैं आपको कठिन स्वभावका जानता था इस कारण यह तोड़ा पृथ्वीमें दबाकर रखवा था । मालिकने उस नौकरसे कहा कि, अये अयोग्य आलसी नौकर ! तूने कुछ नहीं कमाया । यदि तू मेरा तोड़ा सर्फीकों पास भी रखता तो मुझको उसका सूद मिलता, फिर उसका तोड़ा छीनकर जिसके पास दश तोड़े थे उसी को दे दिया, क्योंकि, जिसके पास कुछ है उसको और भी दिया जायगा उसकी बढ़ती होगी । जिसके पास कुछ नहीं उसके पास जो कुछ है वह भी ले लिया जायगा । उस निकम्मे नौकरको बाहर अँधेरेमें ड.ल दिया । वहाँ वह रोता और दाँत पीसता रहा ।
तात्पर्य—परमेश्वरका मनुष्यसे गुप्त रहना मानों यात्रा करना है । जिस समय मनुष्य गर्भमें उलटा लटका रहता है उससे प्रतिज्ञा करता है कि, हे परमेश्वर ! इस नरक यंत्रणासे मुझको बाहर निकाल, मैं तेरी भक्ति करूँगा । परमेश्वर दयालु होता है वह गर्भसे बाहर आता है । उस समय परमेश्वर उसकी दृष्टिसे अन्तर्धान हो जाता है । प्रत्येक मनुष्यको उसने पृथक् पृथक् बुद्धिका तोड़ा बाँट दिया है, किसीको पाँच भाग और किसीको एक भाग । इस प्रकार बुद्धिका तोड़ा अपने प्रत्येक भूत्योंको देकर यात्रा करने गया अर्थात् अन्तर्धान हो गया । जब यह मनुष्य गर्भसे बाहर निकल ज्ञानमान होकर भक्ति बन्दनामें संलग्न होता है, वह पाँच तोड़ेवाला अपने सुकार्य तथा भक्तिद्वारा परमेश्वरको प्रसन्न करता है । दो तोड़ेवाला भी अपने मालिकको राजी करता है पर एक तोड़ेवाला मूर्ख उसे रुष्ट करता है ।
जब मनुष्य मर जाता है पिण्ड प्रलय होता है तब सब मनुष्य परमेश्वरके सामने अपनी भलाई बुराईका हिसाब करानेको उपस्थित होते हैं, सबकी भलाई बुराईका हिसाब होता है । तब परमेश्वर सबका हिसाब लेकर सबको दण्ड पारितोषिकादि देता है । वह तोड़ा मानुसिक चोलाकी बुद्धि है । जिसने शुभ काम किया अपना कर्तव्य पालन किया वह भला भूत्य है, उसकी बुद्धि होगी, जिस किसीने मानुषिक शरीर पाकर मनुष्यत्वके धर्मका प्रतिपालन न किया