कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 798, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंفَلَا تَأْسَوْيْ عَلَيْهِ وَنَفْسٌ فِي ضَيْقٍ قَفَّارٍ
अर्थात्—जब ठीक करूँ उसको और फूंकदूँ उसमें अपनी जान तो गिर पड़ियो उसके दण्डवत्में।
अर्थात् खुदा परितोसे आज्ञा करता है कि, जब मैं अपनी आत्मा फूंक दूँ तब तुम सब फिरिश्ते उसके दण्डवत्को झुक पड़ना। खुदाने आदममें गमन किया। आदम सब मनुष्योंमें इस कारण सर्व मनुष्यों तथा खुदाओंमें अविद्या तथा विद्याकी विभिन्नता है। यदि मनुष्यको विद्या हो तो खुदा तथा मनुष्यमें किसी प्रकारकी विभिन्नताही नहीं रह सकती।
४८ मनुष्यसे बन्दर—कुरानमें (९) सिपारा सूरए आराफ (२०) रुकूअ (१६२ से १६७) आयत पर्यन्त लिखा है। बदल लिया अन्यायियोंने उनमेंसे और नुकता सिवाय उसके जो कह दिया था। फिर भेजा हमने उनपर अज्ञाव आसमानसे बदला उनकी दुष्टताका। फिर बढ़ने लगी जिस कामसे मना हुआ था तब हमने हुकम किया कि, हो जाओ फटकारे हुये बन्दर।
दाऊदके समय शुक्रवारके दिन यहूदको प्रार्थना करना उचित था पर उन्होंने स्वीकार नहीं किया। शनिवारके दिन बन्दना करने लगे। आज्ञा थी कि, उस दिन मछलीका आखेट न करें, पर कुछ लोग करते रहे। खुदाने उन्हें बन्दर बना दिया। तीन दिन तक वे बन्दर रहे इसके पीछे मर गये। बन्दरोंकी सन्तान इन्हींसे अबतक प्रचलित है।
अब यह बात प्रमाणित हुई कि, पहली देहमें मनुष्य थे फिर बन्दर हुए उनसे बन्दरोंका वंश अबतक प्रचलित है।
नरक स्वर्गका जाना—इसी तरह हदीसोंके अनुसार महाप्रलयके मैदानमें चार प्रकारके मनुष्य प्रगट होंगे। वैकुण्ठके लोग, नरकके लोग, पशु तथा कीड़े मकोड़े। यह सर्व स्वरूप जो दिखाई देंगे अपने अपने कम्मनुसार स्थान पावेंगे। वैकुण्ठके वैकुण्ठ, नरकके नरक और इदं गिदं कीड़े मकोड़े और पशुओंमें गमन करेंगे।
४९ खिलाके अभिध्यामें लिखा है:—
إِنَّ الَّذِينَ سَبَقَتْ لَهُمْ أَمْوَالٌ وَأَوْلَادٌ عَمَّا يَبْعُدُونَ
अर्थात्—जिनके निमित्त हमारी ओरसे भलाई हो चुकी वे लोग नरकसे बचे रहेंगे।