भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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न करे तो वह बड़ा अभाग्य है। ऐसा समय फिर कभी हाथ न लगेगा। इस मनुष्य देहके समान और कौन पदार्थ है? यदि इस शरीरमें चूका तो फिर लगातार आवागमन करताही रहेगा बहुत समयतक छुटकारा न होगा।

६० जीवोंका आनंत्य—आत्माके विषयमें मुहम्मदी इस प्रकार कहते हैं कि, खुदाने अनगिनती रुहेँ बनाई हैं यह बात कुछ कही नहीं जाती कि, एक है अथवा अनगिनती। इसका मकान तथा लामकान कहना उचित नहीं। वह एक है और अनेक भी है। उसके विवरणमें जिह्वा गूँगी है। मनुष्य हो अथवा देवता किसीमें कुछ कहनेकी सामर्थ्य नहीं है। यह बात समझना चाहिये कि, पहले केवल एक आदम था। इससे अनगिनती आदम हो गये। वह आदम न विभक्त हुआ न कुछ कम हुआ एक बीजसे वृक्ष उत्पन्न हुआ अनगिनती बीज तथा वृक्ष उत्पन्न हो गये। इस कारण मैं एक उदाहरण लिखता हूँ।

संन्यासीका उदाहरण—एक संन्यासी अपने योगबलसे अपनी आत्माको शरीरसे बाहर निकाल दूसरे शरीरमें प्रवेश करके अपनानाम जलदत्त रखा। एक समय वह जलदत्त सोया पड़ा था,। उसने उस समय स्वप्नमें देखा कि, एक नगरमें गया वहाँ मैं मदिरा पीकर मदमस्त हुआ। फिर उस स्वप्नावस्थामें गया फिर उसी स्वप्नावस्थामेंही दूसरा स्वप्न देखा कि, मैं एक परगनेका रईस हूँ उस शरीरके स्वप्नमें और स्वप्न देखा कि, मैं एक देशका राजा हो गया हूँ फिर उस स्वप्नमें और एक स्वप्न देखा कि, अब मैं स्त्री हो गया हूँ एक देवताकी पत्नी हूँ। फिर उस शरीरके स्वप्नकी अवस्थामें स्वप्न देखा कि, मैं हिरणीकी देहमें हूँ। उस हिरण्यकी देहमें और स्वप्न देखा कि, अब मैं लता हो गया हूँ और लता होकर एक वृक्षकी डालसे लपट रहा हूँ। फिर मैंने उस लताके शरीरमें और स्वप्न देखा कि, अब मैं जम्बूर (चिऊटी) हो एक कमलके पुष्पसे लपट रहा हूँ। उस देहमें स्वप्न देखा कि, अब मैं हाथी होकर ब्रह्माजीकी सवारीमें हूँ। ब्रह्मा मुझपर सवार होकर महादेवके भेंटके लिये गये हैं। जब मैं महादेवकी सभामें गया तब महादेवके दर्शनके प्रभावसे मुझको ज्ञान हो गया और फिर मैंने उस हाथीकी देहमें जो स्वप्न देखा तो मैं क्या देखता हूँ कि, मैं महादेव हो गया। फिर मैंने अपनेको बहुत बड़ा ज्ञानी पाया जब मैं ज्ञानी हो गया तब मुझको अपने सब आवागमन याद आये तब मैं अपनी पहली देहके पास जो संन्यासीकी थी गया। उस संन्यासीको सोतेसे जगाया, वह संन्यासी उठ खड़ा हुआ और अपने जाग्रत अवस्थाका सब कार्य करने लगा। फिर जलदत्तको जगाया। वह भी जागकर अपना सब कार्य करने लगा। रईसकी देहको सोतेसे जगाया