कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 826, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंसिर हिलाती कि, हों। जब कोई पैसा कौड़ी देता तो वह उसका पाँच छोड़ देती, सारे पैसे कौड़ियों लेकर अपने सेवा करनेवालेको सौंप देती थी। यदि वह मनुष्य कह दे कि, इसकी मुझे कोई आवश्यकता नहीं है तो वह उन्हें जिनसे लेती उन्हींको वापस कर देती उस साधुसे मिलकर जितने दर्शनाभिलाषी पलटते थे उन सबको वह पहचानकर उनकी कौड़ी वापस कर दिया करती थी। किसीके पैसा कौड़ीमें तनिक भी हेरफेर न पड़ता था। वह बंदरी बुद्धिके बहुतेरे आश्चर्यजनक कार्य किया करती थी।
सेवक बन्दर—एम. आर. एस. ली महाशयकी अंग्रेजी पुस्तकसे पशुओंकी बुद्धिके विषयकी कुछ कहानियाँ लिखता हूँ। फ्रांस देशकी राजधानी पेरिसमें एक मनुष्यने एक बन्दरको शिक्षा दी। वह बन्दर अनेक आश्चर्य और बुद्धिके कार्य किया करता था। लिखनेवाला लिखता है कि, जब मेरा उस बन्दरसे साक्षात् हुआ तब वह मेरी राह छोड़कर अलग हो गया। मैंने उससे कहा सलाम-तब उस बन्दरने अपनी टोपी उतार झुककर मुझे सलाम किया। मैंने उससे पूछा कि, तुम कहाँ जाते हो? तुम्हारे पास कोई पथ चलनेका आज्ञापत्र है? तो उसने अपनी टोपीमेंसे एक चौकोर कागज निकाला मुझे खोलकर दिखाया। उसके स्वामीने कहा कि, इन महाशयका कपड़ा मैला है। उस बन्दरने अपने मालिककी जेबसे तुरन्तही एक छोटा ब्रश निकाला। मेरे कपड़ेके किनारेको पकड़कर झाड़ दिया फिर मेरे जूतेको साफकर दिया। वह बड़ा ही शिक्षित तथा कृतज्ञ था। जब उसको भोजन दिया जाता था तो वह अन्यान्य बन्दरोंकी तरह तरह खानेको गालोंमें नहीं भरता था। किन्तु मनुष्यकी तरह उसी समय खा जाया करता था जब हम लोग उसको रुपये पैसे देते थे तो वह लेकर उन्हें अपने मालिकके हाथ पर धर दिया करता था।
चंपेन—एक प्रकारका बन्दर है जिसका मुख गम्भीर होता है, वह सब बन्दरोंकी अपेक्षा मनुष्यकी अच्छी तरह नकल कर सकता है। सारे कांध्य गम्भीरता सहित करता है। कभी कभी उसको बहुतही थोडा क्रोध आया करता है। अंग्रेजी भाषामें इस बन्दरको चम्पनजी कहते हैं। इसमें एक छोटी जाति और एक बड़ी जाति होती है। इसकी छोटी जातिका एक बन्दर प्यरिस नगरमें रहता था। उसकी बुद्धिके विषयमें अनेक कहानियाँ प्रचलित हैं। वह कुरसी पर बैठता था। ताला खोलता था फिर बन्द कर देता था। छोटा चमचा लेकर चाय पीता था। छुरी काटेसे भोजन किया करता था। अपना भोजन अलग रख देता था। जब अकेला होता था तब चिल्लाता था अपने को