कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 838, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंविचित्र खेल किया करता था। उस जहाजपर एक कुत्ता था। उसके साथ वह खूब खेला करता था। एक बरसका पूरा होनेके पहले इङ्ग्लेण्डमें पहुँचा दिया।
चीता—बिल्लियोंकी तरह अपने बच्चोंको आपही खा जाया करता है कोई कोई प्रेम भी किया करते हैं। कप्तान विलियमसन साहबका कथन है कि, जब वह बाहर शिकार करने गये तो उन्होंने चीतेके चार बच्चे देखे, उनमें से दो को उठा लाये। उनकी माता शेरनी उस समय वहाँ नहीं थी। रातके समय वे दोनों चिल्लाया करते थे। कुछ दिवसोंके पीछे वह बच्चोंको दूँदती हुई उसी अस्तबलके समीप आ ऐसे जोरसे चिल्लाई कि, उसके सारे रखवाले डर गये बच्चोंको द्वारके बाहर निकाल दिया कि कहीं ऐसा न हो कि, वह शेरनी तख्ता तोड़कर भीतर चली आवे। वह शेरनी रातको ही अपने दोनों बच्चोंको लेकर जङ्गलमें चली गई।
हाथी
हाथी बहुत बुद्धिमान पशु है। उसकी अधिक बुद्धिका प्रमाण यह है कि, वह प्रत्येक वस्तुको आजमाकर तब उसपर पाँव रखता है यदि निर्बल हो तो, उसपर पाँव नहीं धरता, बड़ा कौतुक तो यह है कि, हाथी रस्सियोंपर नाचता है।
सिलोनका हाथी—सिलोन टापू जिसको लङ्का भी कहते हैं, वहां जब उसी देशके मनुष्य राज्य करते थे तो उनका भी यही नियम था कि, जो बंधुवा मारे जाने योग्य होता था उसको हाथीके पाँव तले दबाते थे। जब वहाँका हाकीम हाथीको आज्ञा देता था कि, इस कैंदीको भली प्रकार लिथाड़ जिसमें इसको अधिक कष्ट हो, तब वह हाथी उसको भली प्रकार लिथाड़ा करता था। जब-तक दूसरी आज्ञा न हो तबतक कदापि नहीं मारता था। जब हाकिम आज्ञा देता था कि, अब इसको मार दे तो वह उसको मार देता था। उसके शिरपर एक पाँव और दूसरा पाँव पेटे पर धरकर उसके जीवनका अन्त कर देता था।
उम्र—हाथीकी बुद्धि तीक्ष्ण तथा वयस सौ वर्षके लगभग है।
कृतज्ञता—एकबार सुना गया था कि, एक हाथीके पैरमें एक लोहेकी कील गड़ गई थी वह विवश होकर एक स्थानपर पड़ा रहता था। उसकी सुधि लेनेवाला कोई न था उसके जिस पाँवमें कील गड़ी थी उसको ऊपर किये पड़ा रहता था। जो मनुष्य उधरसे जाता तो उससे इशारा करके बताता कि, मेरे पाँवमें कील गड़ी है परंतु जङ्गली हाथी जानकर लोग डरके मारे भाग जाते थे। अन्तमें एक मनुष्य उसका अभिप्राय समझ गया, साहस करके हाथीके निकट गया। हाथीके पाँवको देखा तो उसमें एक लोहेकी कील गड़ी थी। उसने