कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 853, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंही बल लगावे तथा कितनी ही युक्ति क्यों न करे पर वह भैंसा अपनी पुत्रीको पहचान अपना मुँह उसके मुँहसे मिलाकर पृथक् हो जाता कदापि सम्भोग न करता था । उस पशुको भविष्यके हाल जाननेकी विद्याके बिना अपनी बेटीकी पहचान कैसे होती थी ? इससे पता चलता है उसे भविष्य जाननेकी विद्या थी वो पूर्वजन्मका कोई महात्मा था ।
एक बस्तीमें एक भैंसा रहता था उसको एक मुसलमानने बेबात बरछी मारी । वह जख्मी होकर भाग गया । वह अपना बदला लेनेपर उद्यत हुआ । मुसलमानने भी जान लिया कि, वह भैंसा मुझसे अपना बदला लेना चाहता है । वह सदैव चौकस रहता था । एक दिनकी घटना है कि, मुसलमान बाहर किसी अन्य-स्थानसे लौटता हुआ बस्तीसे दूर एक मैदानमें पहुँचा, भैंसने उसको उस स्थानपर देखा तो मारनेको दृढ़ा । वहाँसे वह मुसलमान भाग न सका । भैंसने शीघ्रतापूर्वक पहुँचकर उस मुसलमानको दबा लिया अपने सींगोंसे उसका पेट फाड़ डाला । उसके सभी अङ्गोंको पृथक् २ कर दिया । वह इतना क्रुद्ध हुआ कि, उसके किसी अङ्गको एक स्थानपर न रहने दिया । उसके अङ्गः प्रत्यङ्गः तितर बितर करके इधर उधर रख दिये ।
गदहा
गानासुननेका शौकीन—गदहे अच्छे २ कार्य करनेके लिये उत्सुक रहते हैं । एक गदहा था वह प्रायः रागबाजा सुनने जाया करता था । एक स्त्री थी जो बहुत अच्छे सुरोंमें गाया करती थी, जब वह गाने लगती थी तो वह गदहा उसकी खिड़की के निकट आ जाया करता था । बड़े ध्यानसे राग सुना करता था । उस स्त्रीने एक दिन एक ऐसा राग निकाला जिसको कि, उसने पहले कभी नहीं सुना था । उस रागपर वह गदहा मोहित हो गया । उसके मकानके भीतर घुस आया बड़े जोरकी आवाज निकालकर चिल्लाता हुआ अपना राग प्रेम प्रगट करने लगा ।
कुछ कुम्हार अपने २ गदहों को लेकर फरीदकोटकी ओरसे फिरोजपुर को जाते थे । फरीदकोटके निकट एक बच्चा मर गया, जिस गदहीका वह बच्चा था, वह अपने मृत बच्चेके निकट खड़ी हो गई । कुम्हार मारकूट कर अपने साथ ले चले मुर्दा बच्चे को उसी जगह पर छोड़ गये । जब बारह कोशके अन्तपर पहुँचे उस गदहीके मनमें, बच्चेके प्रेमका ऐसा जोश आया कि, वह वहाँसे भागकर अपने मृत बच्चेके निकट खड़ी हो गयी ।
न्यायकी प्रार्थना—मैंने किसी पुस्तकमें पढ़ा था, नौशेर्वा बादशाहने महल के बाहर एक घण्टा बौध दिया था, जो कोई फिरियादी घण्टा बजादे तो उसी समय