भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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आया था। कितने साहब लोग डण्डीको रोज एकपैसा दिया करते थे उस पैसोंको एकत्रित करके डण्डी रोटीवालेकी दूकानपर जाकर रोटी भोल लाया करता था। उन साहबोंमेंसे, एक दिन एकके पास पैसा नहीं था डण्डीने अपना पैसा माँगा। उसने कहा कि, मेरे पास तो पैसा नहीं है मेरे घरमें बहुत पैसा है। जब वह साहब घर गया तो द्वारपर कोलाहल सुना। किवाड खुलतेही डण्डी कूदकर अपने पैसेके लिये घरके भीतर पहुँच गया। उस साहबने कौतुकके लिये डण्डीको खोटा पैसा दे दिया वही लेकर नानाबाईकी दूकान गया। नानाबाईने उसका खोटा पैसा देखकर रोटी नहीं दी। वह पैसा लेकर डण्डी उस साहबके पास आया द्वार खटखटाया नौकरोंने द्वार खोल दिया। डण्डी खोटा पैसा साहबके पांव पर धरकर उसको घृणाकी दृष्टिसे देखता हुआ वहाँसे चला गया। डण्डी जितने पैसे पाता था सब खर्च नहीं करता था। एक रबीवारके दिन जब उसको कहींसे पैसा नहीं मिला था तो भी उसको नानाबाईकी दूकानसे रोटी लाते देखकर उसके स्वामीने नौकरसे कहा कि, मकान दूँढो यह कहींसे पैसा लेकर रोटी लाता है। दूँढने लगे तो वह कुत्ता गुरनिं तथा तड़पने लगा। तलाश हुई तो सात पैसा एक कपडेके नीचे दबे पाये, तबसे डण्डी अपने पैसे बाहर किसी जगह धूलमें दबा रखता था। फिर कभी कोनेमें न रखता था। अपने स्वामीकी आज्ञानुसार वह कुत्ता दूरतक अपने स्वामीके मित्रोंके साथ जाया करता पहुँचाकर अपने मकानको लौट आता।

गडेरियेका कुत्ता—बड़ी सावधानीसे भेड़ें चराया करता था। बहुत बुद्धिमान तथा तीक्ष्ण विचारका था। सारी भेड़ोंको भली भाँति जानता था। जिसको उसका स्वामी कहे उसी भेड़को झुण्डसे जाकर उसके पास ला दिया करता था भेड़ोंकी रक्षा किया करता था। यदि कभी उनमेंसे कोई भटक कर इधर उधर हो जावे तो तुरन्तही उसको खींच खाँचकर झुण्डके भीतर कर देता था। सांझ के समय उन भेड़ोंके झुण्डको लाकर बाड़ेके भीतर बन्द कर देता था। यदि कोई वैरी भेड़ोंको नष्ट करने आवे तो उसके ऊपरसे होकर जावे इस विचारसे उसके द्वारपर आप लेंट जाता था। यदि कोई भेड़ी पीछे रह जाती कोई दूसरा कुत्ता आकर उसको काटता तो वह उसका कान पकड़कर ऐसा झड़ झड़ाता कि वह चिल्लाता हुआ भाग जाता। इसके पीछे वह पुनः आकर अपनी भेड़ोंके साथ हो जाया करता।

एक दिन गडेरियेने अपने कुत्तेकी बुद्धिमानी जाननेके लिये यह युक्ति की कि, जब वह कुत्ता आगके पास बैठे और लोग बात चीत कर रहे थे उसने