कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 872, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंअपने बूटको लैस करके उस बूटके ऊपर रेशमी फीता बांध रही थी उसमेंसे एक लैस टूट गई उस समय उसके पास खड़ी हुई कुतियाका नाम लेकर उसने जो मजाकियाने तौरपर कहा कि, मैं चाहता हूँ कि, तू मेरे लिये कोई और दूसरा लैस ले आती, इसके पीछे उस स्त्रीने लैस ठीक किया इस विषयका कुछ ध्यान नहीं किया। दूसरे दिन वह स्त्री पुनः अपने बूटको लैस करनेमें लगी तो कुतियाने दौड़कर नवीन रेशमी लैस उसके सामने धर दिया। इस बात पर लोगोंने अत्यन्त आश्चर्य प्रकट किया कि, कुतियाने उसको कहाँ पाया कदाचित कहींसे चुरा कर लाई होगी।
**स्पायल डाग—**एक मनुष्यके पास था, वो ऐसा जान पड़ता था, वह समस्त बातोंको समझता हो। यदि उसका स्वामी उसके कानमें कहता कि, मेरे लिये अमुक वस्तु ले आ तो वह जाता। यदि वह वस्तु खुली होती तो लाकर अपने स्वामीके चरणोंके पास रख देता, गृहकी स्त्रियां समस्त वस्तुओंको सन्दूकमें बन्द करके ताला लगा देती थीं। क्योंकि वह सारी वस्तुओंको खींच ले जाता था। यही एक दस्ताना खो जावे दूसरा उस कुत्तेको दिखाया जावे तो जबतक वह उसको दूढ़ कर उपस्थित करदे तबतक स्थिर नहीं होता था। एक दिन देखा तो बाजेकी किताबोंके ढेरको हटा उसमेंसे खोये हुए दस्तानेको निकाल लिया। जिसका कि निकालना कठिन था। यदि कोई अपरिचित उसके स्वामीके सकानमें आता तो वह उसपर गुराता। यदि वह मनुष्य न माने और भीतर चला आवे तो कुत्ता एक घण्टा बजा देता जिससे नौकर दौड़कर भीतर आ जाते कुत्तेके घण्टा बजानेके कारणको जान लेते।
**रुपयोंकी सँभाल—**बिल साहबका कथन है कि, एक बार वह सफर कर रहे थे, उनका विश्वासी कुत्ता उनके साथ था। एक दिन प्रातःकाल अपने घरसे कहीं बाहर जाते थे। उस समय उन्होंने रुपयोंकी थैली अपने साथ इस ध्यानसे ली कि सांझ तक घर लौटकर न आसकूंगा। उस समय थैलीमेंसे कुछ रुपये गिर पड़े, जब साहब कहवा खानामें गये वहाँ थैली खोलकर देखी तो कुछ रुपये कम पाये। सांझके समय घर लौटकर आये। नौकरोंने कहा कि, कुतिया कुछ खाती पीती नहीं बीमार है। साहब उस कोठरीमें गये कुतिया दौड़कर उन गिरे रुपयोंको साहबके चरणोंपर धर अत्यन्त हर्षपूर्वक खाने पीने लगी। यहाँ यह स्पष्ट है कि, जिस समय वह साहब कमरेसे बाहर जाने लगे उस समय ही उनसे रुपये गिर पड़े। उनको उठाकर कुतियाने अपने मुहमें रख लिया। यदि खाती तो वे रुपये उसके मुहसे बाहर गिर जाते।