भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 903

एक प्रकारका तार तो चपचपा होता है दूसरा स्वच्छ तथा वारीक होता है । जो चपचपा होता है उसको तो वह वृक्ष अथवा दीवार इत्यादिसे लगा देती है वे दूर दूर तक तने रहते हैं । दूसरे तार जालके लिये हैं । इन्हीं तारों द्वारा मकड़ी अपना जाल बनाती है, इन्हीं जालोंसे आखेटको पकड़ती है । चिपचिपे तार तो घेरा करते हैं स्वच्छ तार केन्द्रके समान मध्यमें होते हैं । मकड़ियोंकी अनेक जातियाँ हैं ।

आठ आंखोवाली—कारसिका भूमिमें आठ आंखोवाली काली मकड़ी होती है । यह बहुत बलिष्ठ होती है, यह जानवरों तथा टिड़ियोंको पकड़ पकड़कर खाया करती है । मकड़ियोंके तारकी बनावट तथा सजावटके बारेमें अंग्रेजी पुस्तकोंमें बहुत कुछ लिखा हुआ है ।

चींटी

चींटी बड़ी परिश्रमी होती हैं । पूर्वकालसे विख्यात है कि, लड़ने तथा घरोंआ काम काज करनेमें यह बहुत निपुण होती हैं । यद्यपि ये छोटी हैं पर बहुत बलिष्ठ तथा दृढ़ हैं, जितना उसका शरीर अधिक है उससे दशगुणा बोज़ा उठाती है बहुत चुस्त चालाक होती हैं । शिर छोटा होता है, जाड़ बहुत दृढ़ होती है । उनका नीचेका होंठ छोटा और गोल चमचेके समान होता है । उसका पेट अण्डाकार होता है उसमें एक अथवा दो गोंठें होती हैं । नरके चार पर होते हैं । नरकी अपेक्षा मादा डील डीलमें बड़ी होती है व सम्भोग कालमें परदार होते हैं उनमें कितनीही मजदूरी तथा परिश्रम करनेवाली चींटियाँ होती हैं उनके जन्मभर पर नहीं निकलता । चींटियोंके घर बहुत अच्छे ढङ्गसे बने हुए होते हैं, उनकी बनावट बहुत विचित्र है । यदि बहारके आधे मौसमसे लेकर पतझड़के मौसम तक चींटियोंका घर देखा जावे तो पर तथा परहारसे भरा होगा । जो नर तथा मादा चींटियाँ हैं उनके पर चमकते होते हैं मिहनती चींटियोंके पर नहीं होते । परिश्रमी चींटियोंमें राजा तथा रानी कोई नहीं, केवल वे दास हैं ।

परवाली चींटियोंमें बादशाह बेगम तथा अमीर—भी होते हैं । राजा तथा अन्यान्य श्रेष्ठ चींटियाँ घरोंमें रहा करती हैं । जब वे बाहर निकलती हैं तो उनकी अरदलीमें सैन्य हुआ करती है । बाहर अकेले कदापि नहीं फिरती समस्त सैन्य उनकी प्रबन्ध तथा सेवामें रहा करती है, जिसमें वे अकेले बाहर न जावें यदि अमीरोंमें कोई अकेला बाहर निकल भी पड़े तो चौकीदार चींटियाँ उनको खींचकर भीतर कर देती हैं । ऐसी अवस्थामें तीन या चार चींटियाँ