कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 905, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंअनुभवो चिटियाँ अण्डोंको उठाकर गरम करके चारों ओर रख देती हैं। जिसमें ऐसा न हो कि, उनकी प्राकृतिक उष्णता उनमेंसे निकल जावे। समस्त दाइयाँ अण्डोंकी रक्षामें बहुतही सचेत रहती हैं। जबतक सारे अण्डोंसे बच्चे नहीं निकल आते तबतक वे सब बराबर सेवामेंही लगी रहती हैं। रातके समय अपने घरके द्वारोंको चारों ओरसे बन्द कर लेती हैं। जिसमें कि किसी ओरसे वायुका प्रवेश न हो, सबेरा होतेही घरके बाहर धूपमें अण्डोंको धर देतीहैं, जिसमें उनको न बहुत धूप लगे न बहुत ठण्डकही सतावे, वे किसी समय कड़ी धूपमें भी धर देती हैं।
बच्चोंका भोजन—जबतक छोटे छोटे बच्चे बाल्यावस्थामें रहते हैं तबतक उनकी दाईं अथवा माता अपने पेटसे एक प्रकारका पतला पतला भोजन निकालकर खिलाया करती हैं। जब वे बच्चे बड़े हो जाते हैं तो वे सब एक प्रकारका झिल्लीदार श्वेतरङ्गका जौके समान सूत कातते हैं जिसको लोग भ्रमवश समझते हैं कि, यह वस्तु चीँटियोंका भोजन है। जो गरमीके समय ठण्डे दिनोंके निमित्त एकत्रित करती हैं
चीँटियोंका भोजन—यह बात भी जानी गई है कि, यूरोपकी चीँटियाँ मांसाहारी हैं। पादरी जेजी उड साहबका कथन है कि, चीँटियाँ शरदीके लिये संग्रह नहीं करतीं बरन जाडेके दिनोंमें वे अचेत होकर सुस्त पड़ी रहा करती हैं। उनके वास्ते भोजनकी आवश्यकता नहीं। इसके अतिरिक्त उस सैन समयमें भोजन पचाना इतना कठिन है कि, जैसे मनुष्यको सूखी घासका पचाना। चीँटियोंका विशेष भोजन चीनी है। जहाँ, कहीं चीनी होती है वहाँ वे अपने सृंघनेके बलकी सहायतासे पहुँच जाती हैं। मिठास वृक्षोंकी जड़ अथवा पुष्प इत्यादिसे मिठास प्राप्त करती हैं। चीँटियाँ इस मिठासको स्वयन् अपनी वस्तु समझती हैं
भोजनपर युद्ध—यदि कोई चीँटी बाधा दे तो उससे बहुत युद्ध होता है। यहाँतक कि, कितनीही चीँटियाँ इस लड़ाईमें मारी जाती हैं।
चीँटियोंके घर—चीँटियोंकी बुद्धिकी कहानियाँ बयानके बाहर ह। चीँटियोंके काम अत्यन्त आश्चर्य्यमें डालनेवाले हैं। मनुष्यकी बुद्धि कुछ काम नहीं करती। चीँटियोंके मकान बड़ीही कारीगरीके साथ बने हुए होते हैं नदीके समीप वे अपने घरोंको बनाती है। लाल श्वेत काले भूरे रङ्गकी चीँटियाँ होती हैं। श्वेत चीँटियोंको दीमक कहते हैं वे नदी किनारे अपने मकान बनाती हैं जिसमें उनको मकान बनानेके लिये पानी शीघ्रही मिल जावे। वह मकान गाव-