भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 923

आई महान् विपत्ति उपस्थित हुई । प्लारेन्स नगरपर कड़कड़ाके बिजलियां गिरें। अन्यायीके घरको गिरा दिया । उसपर मेघपयीका एक घोंसला था वह भी पृथ्वीपर गिर पड़ा । चिड़ियाके खोतेमेंसे मोतियोंकी माला निकल पड़ी । यह पक्षी बहुत चोर है । मनुष्य तथा समस्त जन्तुओंकी बोलीकी नकल करता है । वस्तुओंको चुराकर दूसरे स्थानमें धर देता है । तनिक भी पता नहीं चलता कि, किसने चोरी की ।

रोमसेन साहब—कहते हैं कि, एक मनुष्यके घर एक मेघपयी रहा करती थी । नकल करनेमें यह परम प्रसिद्ध थी । सीटी बजाती, राग और गीत गाती, मुर्गी तथा बतखकी बोली बोलती । मनुष्यके समान साफ २ बातें किया करती । द्वारपर बैठकर आहा आहा करती । मनुष्यके समान ऐसा शब्द करती कि, रखवाले दौड़ आते । वह चिड़िया जोरसे हँसती तथा ठठठा करती । जब नौकरकी स्त्री सम्बोंसा बनाती तो वह चिड़िया भी वही काम करती । यदि स्त्री उस चिड़ियाके ठठठेसे अनभिज्ञ होती तो दौड़ी आती, यदि मनुष्यके ध्यानसे कोई द्वार खोल दे तो चिड़िया भीतर घुस आती, अपनी चोंचमें भोजन लेकर चली जाती । इसके बाद बैठके हर्ष पूर्वक शब्द करती । कुसियोंके पीछे बैठके बोलती । अपने मुखसे प्रकट कहती कि, मैं भूखी हूँ । घरके छोटे लड़कोंको याद दिलाती कि अब मदरसा जानेका समय हो गया । तैयार हो । इधर उधर फिरती थी । कभी भी बिना हानि किये न रहती थी, चोरी करनेकी तो उसकी आदत ही थी । छोटी छोटी वस्तुएँ चुराकर दूसरी जगह धर देती थी ।

मैना चिड़िया ठीक मनुष्योंके समान बोलती है, सारी भाषाओंको ठीक ठीक बोल सकती है । एक मैना एक अस्पतालके पिंजरेमें थी वह ठीक रोगियोंके समान खाँसती थी । उसी प्रकार हाय हाय करती, रोती और बन्दूकके गर्जके समान झनझनाया करती थी । कोई ऐसी भाषा नहीं थी जिसे वह बोल न सकती हो ।

तोता ।

तोता शिक्षा ग्रहण करनेवाला अत्यन्त तीक्ष्ण बुद्धिका पक्षी है । यह मनुष्योंके समान अनेक बातें सीख सकता है ।

निशानेबाज और लिपिके जानकार—पञ्जाब देशस्थ जालन्धर प्रान्तमें एक फगबाडा बस्ती है । वहाँके तहसीलदारके पास एक ब्राह्मण तोते लाया था उनमें यह गुण था कि, छोटीसी तोप चलाया करता, दूसरा तोता खरे खोटे रूप्योंकी पहचान किया करता, तीसरा किसीका नाम किसी भाषामें लिख दो पहिचान लेता । ब्राह्मणने तोप भरकर तोतेके सामने धर दी । तोतेसे कहा देखो