भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 926

तू राजाका दम छोड़ दे राजा जीवित होजाए तब तेर मित्र कौबेका यह झाहा छोड़ देगा । इसरालने राजाके दमको नाक द्वारा उसमें पँठाया । राजा जीवित होकर कहने लगा कि, मैं बहुत सोया । तोतेने राजाको कौवा तथा इसराल इत्यादिकी सारी बातें कह सुनाई । झाहेने कौबेको छोड़ दिया । सब अपनी अपनी जगह जा बैठे । राजा घोड़ेपर सवार होकर सरेकपके घर पहुँचा चौसर खेलनेकी अभिलाषा प्रगट की । तोतेने राजा रसालुको सिखा दिया कि, हे राजा ! सरेकप अपनी बाँहमें छोटे छोटे चूहे रखता है उनको दाव घातें सिखलादी हैं । राजा पांसा फेंकता है तो चूहे राजाकी बाजीका पांसा उलटकर फिर आस्तीनमें घुस जाते हैं । इस कारण तू युक्तिकर कि, बिल्लीके बच्चेको यहाँ छोड़ दे जिसके भयसे चूहेके बच्चे सरेकपकी आस्तीनके बाहर न निकलेंगे । तू बाजी जीत जायगा । रसालूने यही कार्य किया बाजी जीतली । राजा सरेकपकी बेटीको विवाहकर अपने घर ले आया ।

तोतेकी बुद्धिमानी तथा भविष्यका हाल जाननेके विषयमें लोग अनेक प्रकारकी कहानियां कहते हैं। समस्त पञ्जाब देश इस तोतेकाही गीत गा रहा है ।

लंगड़े तोतेकी बांतें—एक लंगड़ा तोता था । कोई मनुष्य उसके पास जाकर पूछता कि, पाँव कैसे टूटा तो वह उत्तर देता कि, मैंने एक सौदागरकी सेवामें अपना पाँव खोया है । महाशय ! लंगड़ेको न भूलना । यह तोता बिचित्र प्रकारकी बोलियाँ बोलता था, आवाज बदलकर बोलके घोड़ोंको ठहरा लेता और चला देता । हँसता तथा प्रसन्नतापूर्वक खिलखिलाता यह बात पूर्वोक्त पुस्तकमें लिखी है ।

एक चालांक तोता—था जो कुछ वह खाता उसका छिलका नीचे डाल देता इसके पीछे बिल्लीको बुलाता । पुश आ—पुश आ — जब बिल्ली जाकर तोतेकी ओर ताक लगाती तो तोता उसकी खुशामद करता हुआ कहता कि प्यारी बिल्ली ! पीछे प्यारकी ऐसी बातें सुनाता वो मोहजाती पर अपनी दृष्टि सदैव अपने बँरी पर रखता ।

हृबश देशका तोता—एक मनुष्यके पास था । वह बहुत धूर्त था । उसका नाम जेको था । वह ऊपर पांव करके मुरखेकी तरह पड़ जाता था । कहता कि जेको मर गया । जबतक उसकी स्वामिन न जाती तबतक मुर्देकी तरह पड़ा रहता । वह गाती तो जेको पुनः जीवित होजाता । यह अधिक हानि करता था इसी कारण इसका पिंजरा अकेलेमें नहीं छोड़ा जाता ।

झिडकीकी नकल— एक दिन वह तोता पिंजरेके बाहर आगया, अपनी