कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअनेकों देह धरेंगे । ऋषिही क्यों ? देवगण भी पशुपक्षी तथा जलचर आदिके रूपमें मृत्युलोकमें विचरते हैं तथा कर्म वश आवागमन करते रहते हैं जो जाने सो । दूसरे अज्ञानियोंको क्या पता हो सकता है । ऋषिमुनि ही क्यों, अनेकों मनुष्य देहधारी प्राणियोंके स्वभाव पशुओं जैसे हैं । गोल्डस्मिथ साहिबने लिखा है कि, एक कुटुम्बके सब मनुष्य उगाल किया करते थे । बिना इसके खाना भी हजम न होता था ।
पशु पक्षी आदि जीव धारियोंका भजन ।
सहस्रों ऐसे जीव हैं कि, पशुका रूप पाया है उनकी श्रेष्ठताका वर्णन करना अत्यन्त कठिन है । सहीह बुखारी व मुसल्लभमें रवायत अबूरीरासे है कि—
चींटियोंका भजन—एक बार हजरत मूसाने खुदासे अर्ज की कि—“ऐ परव रदिगार ! तू गुनहगारोंके गॉवको नष्ट करता है पर उसके साथ कितने अच्छे भी होते हैं, वह भी बिना अपराध उसके साथ नष्ट हों जाते हैं ।” उस समय खुदाके पाससे कुछ उत्तर नहीं आया । एक दिन मूसाको गर्मी मालूम हुई जिसको सहन न कर सके, एक हवादार वृक्षके नीचे जाकर बैठ गये । वहाँ एक चींटीने काट लिया मूसाने क्रोधमें आकर सब चींटियोंको आग लगाकर जला दिया उस समय खुदाने कहा कि हे मूसा ! तू अपनी ओर नहीं देखता कि, एक चींटीके अपराधके कारण सब चींटियोंको जला दिया । यद्यपि ये सब चींटियाँ भजनमें निमग्न हो रही थीं ।
मूसा और पक्षी—किसी दूसरी किताबमें देखा था कि, मूसाको अपने भजनका बड़ा अहंकार था, एक साँसमें चारसौ नाम जपता था । एक दिन जंगलने वृक्षके नीचे बैठा था झरना बह रहा था । मूसाकी दृष्टि वृक्ष पर गई । देखा कि, एक पक्षी बैठा है, वह एक स्वासमें चार हजार नाम लेता है, उसको देखतेही मूसाका अभिमान जाता रहा उस पक्षीसे कहा कि, कुछ सेवा बतलाओ ? पक्षीने कहा कि पानी पिलाओ मूसाने नीचे चशममें पानी दिखा दिया । पक्षीने पानीके ऊपर दृष्टि डाली पर भजनसे निवृत्त हुए बिना पानी पीनेको न उतरा । सामवेद सम्बन्धी किसी पुस्तकमें पशुओंके भजनके विषयमें जो सुना था । वो यहाँ लिखे देता हूँ—
बकरी—भजन करती है कि, हे प्रभु ! मुझको मेरे शत्रुओंसे बचा, मेरा कल्याण कर । वारम्बार उसका यही भजन और आशीर्वाद है ।
तोता—वह भजन करता हुआ कहता है कि, हे प्रभु ! मैं तेरा कृतज्ञ