भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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वरन् सब उसके कोपमें पड़ें, यही एक इसका दयालू होनेका प्रमाण है कि, पापियों पर भी उसकी दया होती है। मनुष्य होकर जो इस सर्वोत्कृष्ट गुणको न धारण करे, वह मनुष्य मण्डलसे बाहर है। जो उस दयालूका दर्शन करना चाहता है एवं उसकी कृपा प्राप्त करके जन्म सुधारना चाहता है, तो अवश्य दया धारण करे, निर्दयी उसकी कृपाके पात्र कदापि न होंगे उसके कोपमें पड़के नर्कमें सड़ेंगे। मांस खानेवालोंके हृदयमें दयाका संचार भी नहीं होता, अपने स्वादके लिये हत्या करते हैं। शाक, जानवरोंका गला मूलीके समान काटते हैं। शहरोंमें कसाई एक अधेलाही देता है मुल्ता लोग प्रत्येक गलेपर एक अधेला लेकर सहस्रों बकरी और भेड़ोंको जबह करा देते हैं। शायद यह मुल्ले और मुसलमान लोग भी, बिहिश्त मिलनेकी आशा रखते होंगे? धिक्कार! धिक्कार! इसी विषय पर कबीर साहिबने भी अपने सच्चे उपदेश दिये हैं कि, मनुष्य सच्ची बातको समझ कर अपना कल्याण कर सके।

झूलना—सन्तकी चाल संसारसे भिन्न है, सकल संसारमें चेहर बाजी।

हिंदू मुसल्मान दोउ दीन सरहद बने. वेद कितेब परपञ्च साजी ॥

हिंदूके नेम आचार पूजा घना, वरत रहत एकादशी राजी।

बकरा मार मुख मांस भक्षण करें, भक्ति ना होय यह दगाबाजी ॥

सर्व ऊपर श्रीकृष्ण गीता कथी, कृष्णकी बातको मान पाजी।

क्या भई वेद गीता पढ़े दृष्टि उघरे नहीं, भैंसकी सींग क्या बेनू बाजी ॥

मुसल्मान कलमा पढ़े तीस रोजा रहे, वंग निमाज ध्वनि करत गाढ़ी।

बकरीको कूटी काटि जीव जबह कर, गाय पच्छाड़के कुही काढ़ी ॥

इस जोर जुल्मसे बिहिस्त त मिलेगी, खून अपराध शिर व्याध बाढ़ी।

माँगेगा हिसाब तब जवाब क्या देवेंगे, चलेंगे फिरिश्ते जब पकड़ दाढ़ी ॥

मोमदिल मेहरवान दिल उस दिलको, बिहिश्त रोजी बिहिश्त ठाढ़ी।

कहैं कबीर वन्दे साहबी सो करे, सत्य जो चीन्हके झूठ छाढ़ी ॥

तम प्रिय होनेका कारण—प्रायः हिंसक जीवधारी प्रकाशको सहन नहीं कर सकते जैसे उल्लू, चमगीदड़ आदि बहुतसे मांस अहारी जीवधारी प्रकाशसे ऐसी घृणा रखते हैं कि सूर्यके निकलतेही बिलोंमें जा छिपते हैं शामको पूरी अँधेरी तक मुँह भी नहीं दिखाते। जब अँधेरी रात होती है तो आनन्द पूर्वक इधर उधर फिरते हैं, ऐसे करनेका कारण केवल मांस अहार है, जिससे उनका अन्तःकरण अन्धकारमय हो गया है इसी कारण, वे अन्धकारकोही स्वीकार करते हैं।