कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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सत्यसुकृत, आदिअदली, अजर, अचिन्त, पुरुष, मुनीन्द्र, करुणामय, कबीर, सुरति योग, संतायन, धनी धर्मदास, च्छ्रामणिनाम, सुदर्शन नाम, कुलपति नाम, प्रबोध गुरुवालापीर, केवल नाम, अमोल नाम, सुरतिसनेही नाम, हक्क नाम, पाकनाम, प्रकट नाम, धीरज नाम, उग्र नाम, दया नामकी दया वंश- व्यालीसकी दया
अथ श्रीबोधसागरे
सप्तविंशतिस्तरंगः
आत्मबोध प्रारम्भः
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रेखता
भक्ति भगवानकी बहुत बारीक है, शीस सौंपे बिना भक्ति नाहीं। होय अवधूत सब आश तनकी तजै, जीवता मरै सो भक्ति पाहीं ॥ नाचना कूदना तालको पीटना, राँड़िया खेलकी भक्ति नाहीं । रैनदिन तार निर्धार सो लागीरहै, कहैं कबीर तब भक्ति पाहीं ॥