भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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बोधसागर

जिस धर्मका स्वांग बनाया हो, उस धर्मके ऊपर पड़ते हुए विधर्मियोंके आक्रमणकी उपेक्षा कर जो स्वमान मर्यादाकी मरम्मतमें लगा रहे उस धर्मविध्वंसी मिथ्या स्वांगधारीको मूर्ख समझना चाहिये ।

स्वधर्मकी जिन बातों और कर्मोंसे हाँसी होती हो, उन कर्मों और बातोंमें प्रकृत होकर, स्वधर्मके सिद्धान्तको न जाननेवाले, अथवा उसकी निन्दाकरनेवाले धर्म दूषियोंसे जो मेल मिलाप बढ़ावे वह धर्मघाती मूर्ख है ।

इस प्रकार संसारमें भले कहलाते हुए भी मूर्खताके ही वनमें भटकनेवालोंका संक्षेपसे वर्णन किया । सज्जन जन इसे विचारें और आत्मसुधारके मार्गको पक्षपात रहित होकर ग्रहण करें ।

इति श्रीधर्मबोध प्रथम भाग समाप्त