कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंकमालबोध
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विवेचन
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कमालबोधकी केवल एकही प्रति सम्बत् १९११ की लिखी हुई मेरे पास है। जिस परसे यह पुस्तक छापी गयी है। पाठक! एकबार आप अनुरागसागर आदिग्रन्थोंमें लिखे बारह पंथका हाल स्मरण कीजिये फिर इस ग्रन्थोंके आशयसे मिलाइये। अब आप स्वयम् विचार कीजिये आप किस ग्रन्थको सत्य और किसको असत्य मानते हैं। और ग्रन्थोंमें कमाल साहबको साक्षात् कालदूत लिखा है। इस ग्रन्थमें कबीर साहेब खास वही भेद जोगुरुधर्मदास साहबको बतलाया है वही मुक्ति भेद कमालको बतलाने की बात कहते हैं। भला बतलाइये तो वह सत्य की यह ? इसी प्रकार कबीरपन्थके सबग्रन्थोंमें गड़बड़ और पूर्वापर तथाविषयान्तरका भेद है इन्हींग्रन्थोंको कबीरपन्थीगुरु और महन्त लोग अपनामार्ग दर्शक मानते और घमण्ड करते हैं। यही कारण है कि आज कोई भी कबीरपंथी महंत साधू और सेवक किसी विचार पर स्थिर न होकर मारे मारे और भटकते फिरते हैं। और विषयवासनामें लुप्त हो संसारकी मर्यादा और सत्यगुरुकी आज्ञाका उल्लंघन कर न करने योग्य कर्मोंको करके कबीरपंथकी निन्दा करा रहे हैं। यही गड़बड़ देखकर अच्छे २ विचारपने सत्यगुरुके उपदेशको समझने और जाननेवाले लोग कबीरपंथी कहलानेसे ही लज्जित होकर इस पन्थको छोड़ते जाते हैं जिसके पूर्ण वृत्तान्त कबीर धर्मसारमें लिखा जायगा।
इति