भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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बोधसागर

गोमती सामवेद उपनिषद ब्राह्मणकेनतत्त्वमसिमहावाक्यओंकार मात्रा तीर्थ आश्रम द्वै पद ॥

इति

अथ उत्तर दिशा वार्ता

उत्तर दिशा जोशीमठ आनंदबार संप्रदा पद तीन गिरि पर्वत सागर क्षेत्र बद्रिकाश्रम नारायणदेवतापुण्यागिरीदेवीत्रोटकाचार्य नंदा ब्रह्मचारी तीर्थ अलकनंदा ब्राह्मण ब्रह्माअथर्वणवेद मांडूक्य उपनिषद आ मात्रा अहं आत्मा ब्रह्मा महावाक्य ॥

इति

अथ दक्षिणदिशा वार्ता

दक्षिण दिशा शृंगेरी मठ भूरीबार संप्रदा सरस्वती भारतीपुरी पदानि क्षेत्र रामेश्वर आदि वाराह देवता कामाक्षीदेवीशृंगीऋषि पृथ्वीधराचार्य तुंगभद्रा तीर्थ यजुर्वेद बृहदारण्यउपनिषदब्राह्मण इच्छावश है अहं ब्रह्मास्मि महावाक्य अर्थमात्रा ॥

इति

अथ संन्यासआचार वर्णन

दोहा—सकल कर्मको छोड़िके, जो लेवै संन्यास ।

स्वर्ग आदिक सब सुख घने, रहै न कोई आस ॥

चौपाई

सुत बित नारि ईषणा तीनी । तजि संन्यास धर्मनिजलीनी ॥

यज्ञहु वेदपाठ नहिं भाषा । संग्रह सदा उपनिषद राखा ॥

करहि कमंडल हाथमें दंडा । फिरै स्वच्छंद पृथ्वी नौ खंडा ॥

कछु सुख साजन यकठे धरहीं । काहूसे विवाद नहिं करहीं ॥