भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished2,136 पृष्ठ

पृष्ठ 1821, कुल 2136 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1821

सुमिरनबोध

( १५ )

सच्चिदानन्द सो सदा उजागर । योग संतायनपतिसुखसागर ॥ सुर्त नामसों जपिये ज्ञानी । अमी अंकूर बीच सहिदानी ॥ प्रथम पुरुष सबहीके मूला । अमीदीप नाम है अस्थूला ॥ आलख नाम पुरुषोत्तम गाऊँ । नाम मुनींद्र सदा गोहराऊँ ॥ सर्व मई साधनपति सोई । भक्तराज बूझो नर लोई ॥ सत संतोष सो सदा सनेही । शब्दसरूपी अविचल देही ॥ प्राण नाक पिव अमृत बानी । सत्यलोकपति नाम बखानी ॥ सदगुरु जन्म निवारक जानौ । बन्दीछोर निश्चय कै मानौ ॥ अवागमनके दुःख मिटावो । चौरासी लक्ष बन्द मुक्तावो ॥ शील रूप संतोष पियारा । धर्मराय शिर मर्दन हारा ॥ मुक्तिदाता शीतल उजियारा । नाम परायण प्राण पियारा ॥ अस्थिर नाम अभयपद दाता । अक्षयराज नायक विरुध्याता ॥ सत्यसाहेब कहो बहोर बहोरी । अक्षय वृक्ष हिरामय डोरी ॥ पुढूपदीप मण्डप गुरु सांचा । हँस सोहँग नाम बिच राजा ॥ सोहँ शब्द नाम है सारा । सत्यवचन बोले कडिहारा ॥ इच्छा रूप संत जन गावै । ज्ञानहि बीज अमोल कहावै ॥ अबोल अशोच असंशय धीर । नाम एकोत्तर कहैं कबीर ॥ एकोत्तर नाम सुमिरे जो कोई । ताको आवागमन न होई ॥ नाम एकोत्तर सुमिरे जबही । सद्गुरु बैठे सिंहासन तबही ॥ आरती नाम एकोत्तर चहिये । एकोत्तर विनाननरियन गहिये ॥ आरती नाम एकोत्तर धारा । एकोत्तरी विनाकैसोकडिहारा ॥ विना एकोत्तर नहीं निस्तारा । कैसेहु निज मानो कडिहारा ॥ एकोत्तर नाम जानै विस्तारा । सो जानो सांचो कडिहारा ॥ पांच नाम इनहीमों भाषा । सहज पक्ष पालन है साषा ॥ सुर्तसहजपालजरंगश्रवणहै भाई । हँसनतिलकएकोत्तरिलेहोजाई ॥