भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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( २० )

बोधसागर

कौन विरवा जो बोलत है ताको चीन्हो । कबीरगोसाईकी आज्ञा सों । जिवसो यमसो तिनका टूट यमके मुखमें थूक ॥

स्मरण ज्योती शीतलकरनेका

साखी-आदि अन्त यक ज्योति है, अस्थिर थीर है नीर ।

सात द्रौप नौ खण्डमें, एकहि सत्य कबीर ॥

स्मरणमिठाई मालूम करनेका

श्वेत मिठाई उत्तम पाना । लौंग लायची श्वेत प्रधाना ॥

केरा कदली और सुगन्धा । तबही हंसा होय अनन्दा ॥

यहिविधिकरोमिठाई । कहै कबीरधर्मदाससोतबहमकोभोगलगाई

स्मरण पानप्रसाद मालूमकरनेका

चौँका लेय मिठाई धरी नरियर धोती पान ।

हंसा बैठे आसन पर पूर्वहि आज्ञामान ॥

पुरुष बैठे आसन हंसहि नाही मार ।

कहै कबीर मिठाई मालूममानसरोवरपार ॥

स्मरण आरती सौपनेका

जोई आरती वारे, सोई बुझावै आन ।

जहां ज्योतिझिलमिल करे, सोई पहिचान ॥

अपनो तन मन खोजो, आप करो चितएक ।

शीतल करो आरती, पुरुषनाम गहिटेक ॥

कहै कबीर यह सुमिरण, सन्तो करो विवेक ।

अबकी बेरा चेतहु, तारों कुटुम समेत ॥

स्मरण आरती प्रकाश करनेका

सोहंग नामले आरती वारे आपतरे औरनको तारे ॥

सोहंग नामनिज सुमिरके, करो आरती प्रकाश ॥

कहै कबीर धर्मदाससों मिट गये यमके त्रास ॥