कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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सुमिरनबोध
( ५५ )
नारद उपदेश धिमरसे पाये । चौरासीसे तुरत बचाये ॥ गुरु कह सोई है सांचा । बिलु परचे सेवक है काँचा ॥ गुरु सामरथ सबके पारा । गहे शरण उतरे भवपारा ॥ कहैं कबीर गुरु आप अकेला । दशो औतार गुरूका चेला ॥
सारखी-राम कृष्णसों को बड़ा, तिनहू तो गुरु कीन्ह ।
तीन लोकके वे धनी, सो गुरु आगे अधीन ॥
हरिसेवा युगचार हैं गुरु सेवा पल एक ।
तासु पटतर ना तुले, संतन किया विवेक ॥
अथ प्रचलित गुरुमहिमा कबीर दर्शन लाइब्रेरीके संस्थापक कबीरपंथी भारतपथिक स्वामी श्रीयुगलानन्दद्वारा संगृहीत संशोधित और सम्पादित ।
इति श्रीतृतीय खण्ड गुरुमहिमा समाप्त