भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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कबीर चरित्रबोध

( १८१५ )

हूँ । इतना कहकर कबीरसाहब बादशाहको साथ लिये हुए वहाँ गये जहाँ स्वामी रामानंदका मृतक शरीर पड़ा हुआ था । वहाँ जाकर सबने देखा कि, स्वामीके दाहिने अङ्गसे खूनके बदले दूध बह रहा है और बाई ओरसे रक्त निकल रहा है । यह आश्चर्य देखकर सब चकित हो गये । बादशाहने कबीर साहबसे पूछा कि इसका क्या कारण ? लोहूके बदले दूध कैसे निकल ?

सिकन्दर वचन

पय औ रुधिर चल्यो गुरु अङ्गा । शाह कहैं यह कौन प्रसङ्गा ॥

कबीर उत्तर

जेहि तन मान्यो शब्द हमारा । तेहिते चले दूधकी धारा ॥ कीन्ह कालहू केर विचारा । आधा अंग रुधिर अनुसार ॥ अगले जन्म मुक्ति जो होई । अंकुरी जीव कहावै सोई ॥

ज्ञानसागर

रामानन्द स्वामीका पुनर्जीवन

पश्चात् कबीर साहबने एक सफेद चादर मैगाया और स्वामी-जीका शिर तथा धड़ इकट्टा जोड़कर ऊपर वही चादर ओढ़ा दी । फिर बादशाह वगैरह ऐसे लोग जिनका दर्शन करना गुरु अच्छा नहीं समझते थे वे सब लोग अलग हो गये केवल कबीर साहबके सहित सब शिष्य लोग वहाँ रह गये, तब कबीर साहबने पुकारकर कहा-हे गुरो ! हे स्वामिन् ! ! अब राम राम कहनेका समय हुआ है । देखिये सन्ध्या निकट है । शिष्यवर्ग आपके दर्शनके लिये व्याकुल हो रहे हैं, अब कृपासागर उठिये और सबको दर्शन देकर कृतार्थ कीजिये ।

कबीर साहबके इतना कहते ही रामानन्द स्वामी राम राम कहते उठ बैठे ।

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