कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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कबीर चरित्रबोध
(१८२५)
जब कबीर साहबने उस सुरदाको जीवित किया, तब बादशाह और शेख एकदम आश्चर्यमें आकर बोल उठे कि, वाह आपने तो बड़ा कमाल किया। कबीर साहबने कहा अच्छा लो आजसे इस लड़केका नाम भी कमाल हुआ। यह जगत्में मेरा पुत्र कहलाकर प्रसिद्ध होगा। उसी दिनसे कमाल हुआ और वह कबीरका पुत्र कमाल कहलाता है।
इस प्रकार शेखने कबीर साहबसे बावन लीलाएँ देखीं तब बादशाह और शेखजी दोनों कर जोड़कर खड़े हुए और निवेदन करने लगे कि, ऐ कबीर साहब ! आप परमेश्वर हो और आपही खुदा हो और आपही हमारे गुरु तथा पीर हो। हमारा सब अपराध क्षमा करो। तब कबीर साहबने कहा कि; आपका कुछ दोष नहीं है।
सार्वी-कंध कुल्हाड अघाल, मस्तक दीना भार । गरीब शाह यों कहे, बखशो अबकी बार ॥ तहाँ सतगुरु लौलीन हो, परचा अबकी बार । गरीबदास शाह यों कहे, अछा देव दीदार ॥ सुनो काशीके पंडितो, काजी मुछा पीर । गरीबदास उस चरण गहि, अछा अलख कबीर ॥ यह कबीर अछाह है, उत्तरा काशी धाम । गरीब शाह यों कहे, झगड़ मुए बेकाम ॥ क्यों बिगड़ी डगरी दुनियां, कहत कबीर समूल । गरीबदास उस वृक्षके, अनंत कोटि रँगफूल ॥ ऐ कबीर तुम अछा हो, पलक बीच परवाह । गरीबदास कर जोरके, ऐसे कहता शाह ॥