कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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कबीर चरित्रबोध
( १८३९ )
मिले और कहा कि, जिस सेवाके निमित्त आप आज्ञा देवें उसको मैं कहूँ। तब कबीर साहबने आज्ञा दिया कि, पाँच दिवसकी उत्पन्न हुई बछियाके स्तनसे दूध दुहकर मेरा कमण्डलु भर दो—तब नानक शाहने कहा कि, पाँच दिवसोंकी उत्पन्न हुई बछिया कैसे दूध दे सकती है? तब कबीर साहबने कहा कि, यही मेरी सेवा है तुम करो। तब नानकशाहने हूँद ढाँढ़ कर पाँच दिनसोंकी उत्पन्न हुई बछियाको उपस्थित किया, जब दूध लेनेको उसके समीप गए, तब वह बछिया लात चलाकर भाग गई। तब नानकशाहसे कबीर साहबने कहा कि, अब तुम जाओ और मेरे नामसे उस बछियासे दूध माँगो—और कमण्डलु उसके स्तनके नीचे रख दो। नानकशाहने बछियाके स्तनके नीचे कमण्डलु रखकर कबीर साहबके नामसे दूध माँगा और बछियाके स्तनसे आपसे आप इतना दूध निकला कि वह कमण्डलु भर गया। तब कबीर साहबने नानक साहबसे कहा कि, ऐ नानकजी! आपने वंदना तो बहुत की परन्तु अभीलों आपकी कगाईमें बुटि है। और आपका पंथ चलेगा और बहुत लोग आपकी आज्ञामें चलेंगे और भविष्यतमें ये रंग ढँग होंगे। और नानकशाहसे कबीर साहबने बहुत कुछ कहा—और इसी ग्रन्थमें नानक शाहके विषयमें भविष्य वाणी है। और नानक धर्मका विवरण किया जो भविष्यतमें होनेवाला है। और इसी स्थानपर यह साखी है। “तिल घोंटतारे लगे” इत्यादि है और इसी स्थानपर यह है।
ऐसो दाता सत्य कबीर, सूखी नदी बहावे नीर । भूखेको खिलावै खीर, नंगेको पहनावे चीर ॥