भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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( १०८ )

अनुरागसागर

कबीरवचन धर्मदास प्रति

ऊदा त्रास पुरुष कर माना । चन्दन साहु जवै रिसियाना॥

चन्दनस हुवचन धर्मदास प्रति

बालक चेरी लेहु उठाई । लै बालक जल नेहु खसाई॥

कबीर वचन धर्मदास प्रति

चल चेरी बालक कहैं लीन्हा । जलमहँडारनताहिचितदीन्हा॥

चलिभइ मोहि पवारन जवहीं । अन्तरधान भयो मैं तवहीं ॥

भयउ गुप्त तेहि करसे भाई । रुदन करे दोनों बिलखाई ॥

बिकल होय मन दूदत डोलै । मुग्धज्ञान कछु मुखनहिं बोलै॥

सुपच सुदर्शनके माता पिता तीसरे जन्ममें नीमा हुए

यहिविधिबहुतदिवसचलिगयऊ।तजितनजन्मबहुरितिनपयऊ

मानुष तन जुलहा कुल दीन्हा । दोउ संयोग बहुरिविधि कीन्हा॥

काशी नगर रहे पुनि सोई । नीरू नाम जुलहा होई ॥

नारि गवन लावे मग सोई । जेठमास बरसाइत होई ॥

नारि लिवाय आय मगमाहीं । जलअचवन गहबनिताहीं ॥

ताल नाहिं पुरइन पनवारा । शिशु होय मैं तहैं पगुधारा ॥

तहाँ जस बालकै रहैं पौढाई । करौं कुतूहल बाल स्वभाई ॥

नीमा दृष्टि परी तिहि ठाऊ । देखत दर्श भयो अति चाऊ॥

जिमिरविदरशपडुमबिगसाना । धाय गयो धन रंक समाना॥

धाय गही कर लिया उठायी । बालक लै नीरूपहैं आयी ॥

जुलहा रोष कीन्ह तेहि वारी । बेगि देहु तुम बालक डारी॥

हर्ष गुनावन नारी लाई । तब हम तासो वचन सुनाई॥

१ बरसाइत बटसावित्रीका अपभ्रंश है । यह बटसावित्री व्रत ज्येष्ठ शुद्धपूर्णिमासीको होता है इसकी विस्तारपूर्वक कथा महाभारतमें है । उसी दिन कबीर साहब नीमा और नूरीको मिले थे इस कारणसे कबीर पंथियोंमें बरसाइत महात्म पंथकी कथा प्रचलित है । और उस दिन कबीरपंथी लोग बहुत उत्सव मनाते हैं