कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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बोधसागर प्रथमभागकी अनुक्रमणिका
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इसमें तीन तरंग हैं जिनमेंसे प्रथम तरंग ज्ञानप्रकाश पृष्ठ ९ से आरम्भ होकर पृष्ठ ६५ पर समाप्त हुआ है।
दूसरा तरंग अमरसिंह बोध है जो पृष्ठ ६९ से आरम्भ होकर पृष्ठ ९२ पर समाप्त हुआ है।
तीसरा तरंग वीरसिंह बोध है जो पृष्ठ ९७ से आरम्भ होकर पृष्ठ १२७ पर समाप्त हुआ।
अब तीनों तरंगकी विषयानुक्रमणिका नीचे देते हैं।
ज्ञानप्रकाशकी अनुक्रमणिका
| विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|
| कबीर साहबका जिन्दा रूपसे मयूरामें धर्मदास साहबको प्रथमवार मिलना | |
| ५ कबीर साहबका गुप्त हो जाना (धर्म-दासजीकी विरह) | ९ |
| छठे दिन कबीर साहबका धर्मदास साहबसे दूसरी बार मिलना | १४ |
| धर्मदासजी का गुरु रूपदासजीके निकट जाकर ज्ञान पूछना | २० |
| धर्मदासजीका साहबसे मिलनेकी चिन्ता करना और सद्गुरुका जिन्दा रूपसे तीसरीबार दर्शन देना और धर्मदास साहबका रसोई बनाने हुए चाँटीके जलनेसे डूबी होना और साहबको पहचानना | २१ |
| त्रिगुण जालका वर्णन | २२ |
| सत्यनामकी महिमा | २३ |
| धर्मदाससाहबको सद्गुरुसे शिष्य करने के लिये प्रार्थना और उत्तर | २९ |
| कबीर साहबका तीसरी बार गुप्त हो जाना और धर्मदास साहबका व्याकुल होना | |
| ३१ धर्मदास साहबका सद्गुरुसे मिलनेके लिये भंडारा करना और चौथीबार सद्गुरुका मिलना | ३१ |
| बेब भता वर्णन | ३१ |
| विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|
| धर्मदासजीका सद्गुरुसे दीक्षा देनेकी प्रार्थना करना तथा रतनासे मिलना | ३३ |
| धर्मदाससाहबका चौका आरती कराके गुरुमंत्र लेना | ३४ |
| धर्मदाससाहबका प्रतिमाके विषयमें प्रश्न करना और सद्गुरुका रहनी बतलाना | |
| ३१ धर्मदासजीका अपने पिछले जन्मका हाल पूछना और सद्गुरुका बतलाना ! | ३६ |
| सर्वानन्दकी कथा | ३८ |
| आरती विधि | ५० |
| कबीर साहबका चौथीबार अन्तर्धान होना और धर्मदास साहबका व्याकुल होना | |
| और पांचवीबार फिर मिलना | ५५ |
| धर्मदासजीको सत्यलोक दिखाना | ५६ |
| हंसरहनीवर्णन | ६१ |
| पठित मूर्खका वर्णन | ६३ |
| कांसिजर देशका बुसांत | ६३ |
| साधन वर्णन | ६४ |
| समाप्ति | ६५ |
| इति। |