कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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बोधसागर
( १५ )
छन्द-गये राजा लोक कहैं तजिया सब मान गुमान हो ॥ इमि हंस धर्मनि जो मिले तुम देहु ताको पान हो ॥ कहै कबीर जो शब्द मानै सकल तजि नामे गहै ॥ अपवर्ग निश्चय ताहि कहैं नहि पला पकडत काल है ॥ सोरठा-जो हंसा इमि होय, शब्द सार तासों कहो ॥ काग चाल तिन खोय, हंस चाल गहि लोक लो ॥
इति श्रीप्रबंधभोपालबोध समाप्त
इति श्रीबोधसागरे कबीरधर्मदाससम्वादे भोपालबोधवर्णनो नाम चतुर्थस्तरंगः