कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( १४ )
मुहम्मदबोध
मोकाम ९
तहाँते सहज द्रौप परमाना । दोय असंख तहाँते जाना ॥ ताहि मोकाम नाम आहूता । सोभा ताकी देख बहूता ॥
मोकाम १०
साखी-पहुँचे जायके लोक जहाँ, सन्त असंख दस लाख ॥ सो मोकाम जाहूतका, दस मोकाम यह भाख ॥
चौपाई
सलामा लेक तहाँ हम कीना । दस्ताबोस उनहु उठिलीना ॥ तहाँते अमरलोकको छोरा । नबी कवीर पहुँच तेहि ठौरा ॥ अमरलोकके हंस सब आये । तिनकी सोभा कही न जाये ॥ भरि भरि अंक मिले तहाँ आये । देखि मुहम्मद रहे खुलाये ॥ सब मिलि हंस गये पुनि तहाँवा । साहेब तखत पै बैठे जहाँवा ॥ जगर मगर छतर उजियारा । आम धनी का कहो बिहारा ॥ असंख भानु पुरुष उजियारा । अमरलोकको कहो विस्तारा ॥ सकल हंस तहाँ दरशन पाई । तिनकी सोभा बरनि न जाई ॥ तहाँवा जाय बंदगी कीना । नबी भये जो बहुत अधीना ॥
मुहम्मदवचन
चूक हमार बकस कर दीजै । जो तुम कहो सोई हम कीजै ॥
पुरुषवचन
कहु मुक्तामनि बेगि तुम आये । दूसर कौन सँग ले आये ॥
मुक्तामनि वचन
तब हम बचन पुरुषसे कीना । दोउ कर जोर बंदगी कीना ॥ तुम जो राज निरञ्जन दीना । तापर हुकुम अक्षरको कीना ॥ दोऊ अंश दोऊ दीन चलाये । तामें मृष्टि पकड़ि खुलाये ॥ तामैं एक सो हम ले आये । सो तो तुम्हरे कदम दिखाये ॥