भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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बोधसागर

( २५ )

नवमं जाह्नतका वृत्तान्त

यह जाह्नतके ऊपर दो असंख्य योजना ऊँचा है। और बीचमें मूग्य तथा अंधकार है—इस स्थानमें सहज पुरुष रहता है—और सत्यपुरुषका सबसे बड़ा पुत्र यही कहलाता है। यह नवीं स्थान सबसे सुन्दर और आनन्द पूर्ण कहलाता है। कबीर साहबने मुहम्मद साहबको वह स्थान दिखलाय और इसका विवरण करके फिर आगेको चले।

दशमं जाह्नतका वृत्तान्त

जाह्नत और जाह्नतके बीचमें दश असंख्य लाख योजनाका अन्तर है अर्थात् स्थान जाह्नत जाह्नतके ऊपर दश असंख्य लाख योजना ऊँचा है और यही स्थान सत्यपुरुषका है इसकी सुन्दरताका विवरण किया नहीं जा सकता है इसी स्थानसे कबीर साहब सत्यपुरुषको आशा लेकर पृथ्वीपर आया करते हैं और इसी स्थानके रसूल पाक है और इसी सत्य पुरुषके सत्यलोकमें जब हंस पहुंचते हैं तब कालपुरुष उनको नमस्कार करता है और उन हंसका आवागमन फिर कभी नहीं होता। वे हंस सत्यपुरुषको स्तुति किया करते हैं और वे सत्यपुरुषके स्वरूपको प्राप्त हो जाते हैं : सत्यलोकके आधीन अठासी सहस्र हीय है और सब हीयोंमें सत्यपुरुष हंस आनन्द करते हैं उनके भोजन तथा चरित्राविका विवरण नहीं हो सकता है।