कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंबोधसागर
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सादिकोबरहकहैयहकौलेलबीब । हैव्यानै आदमी सिंहरे अजीब॥ बादशाहसुनकरयहतकरीरेवजीर । होगयादामेतवहुममें असीर ॥ करकेआखिरकारतफवीजेवजीर । बादशाहघरमेंहुआरौनकपजीर॥ कह गया उससेकितूसुखतारहै । नेकवबदकाइसकेतुझपरबारहै ॥ लैकबदअहदी है इन्दुछाहबद । है नतीजा ऐ खेरदआगाहबद ॥ किजियोकुछतदवीरऐसीवजीर । तंगजिससेहोनयहमदैंफकीर ॥ घरमेंअपनेबादशाहदाखिलहुआरहगयाउसकावजीरऔरवहगदा॥
इस प्रकारसे बादशाहको समझा बुझाकर वजीरने महलमें भेज दिया । अब अह्मशाह और वजीर रह गये तब वजीरने अह्मशाहसे कहा—
उसको धमकाकर लगा कहने वजीर ।
क्या हुआ है तुझको ऐ मरद कफकीर ॥
तूजो यों गुस्ताखेकरतौहकलाम । बरमलालेताहैशहजादीकानाम॥ तुझकोहकुछअकृभी ऐ बेहया । शहजादीवहहै तूसुफलिस गदा॥ नाम शहजादीका गरतूने लिया । होगाहरहरबन्दतेराजुदा ॥ काटकर तेगोंसे मैं तेरी जुबाँ । दारपरखीचूँगा तुझको बेगुमाँ ॥ जिस्तगर चाहे तो इशतगफारकर । इसरुयालेखामसेअपने गुजर॥
वजीरकी धमकी और विश्वासघातकी बातको सुनकर अह्मशाह बहुतही दुःखी हुए और फिर अपनेको सँभालकर वजीरसे कहने लगे—
जबसुनीअह्मनेउसकीगुफतगू । बोलाऐबदअहदनासंजीदःखू ॥ भूलताहै उसखुदायपाकको । जिसने यह रुतबःदिया है खाकको॥ तूनेवहजामिनदियाथा दरम्याँ । जिससेकायमैंहजमीनोआसमाँ॥ आलिमोदामावदारायजहाँ । कादिरे मुतलक शहे शाहनशाहाँ॥
जार इबाहोमते