भारतकोश
कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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बोधसागर

( १५ )

जबकहा अद्भमने ऐआलमपनाह। सुवतलासकतेमैथीवहरश्कमाह ॥ खल्क उसदुखतरकोसुदाजानकर। कब्रमेंचुपरखकेआयीअपने घर॥ कब्रमें उसकोकिया था दफनजब। एकपहरभरसेसिवागुजरीथीतब॥ मिट्टी जो डाली थीं उससन्दूकपर। जिसकेअन्दरथीवहमाहेसीमवर॥ कुदते हकसे हवाका रास्ता। रहगया था कब्रके अन्दर खुला॥ था जिलाना बसकिमज्जूरे खुदा। इस सबबसे कब्रमें रखना रहा ॥ मुझकोजजे इश्कमें आयी तरंग। कब्रपर उसके गया मैंवे दरंग ॥ पासवान कब्र सोते देखकर। लाशदुखतरकोकिया मैंनेबदर ॥ लाशको मैंने निकाला कब्रसे। फिर कियाहमवारमिट्टीडालकर॥ मैं वले मुर्दाहो उसको जानकर। रखकेउसकीलाशकोबलायसर॥ जल्दतर उस दश्तोबरमें लेगया। थी जहाँ ऐ शह मेरी रहनेकीजा॥ करके रौशन आग मैं बैठ। वहाँ। बाहजार्। दर्द वअन्दोहो फिगा॥ देखता था हुस्नकी उसके बहार। औररोताथा निहायत जारजार॥ कुदरते हकसेहुआ बारिद वहाँ ऐन। उस हालतके अन्दर कारवाँ॥ देखकर आतशको रौशनएकजवाँ। आगलेनेके लिये आया वहाँ ॥

पास वाने कब्र उसको जानकर।

फर्त दहशतसे हुआ दिलमें मुनतशिर ॥

दश्तमें मुर्दे को तनहा देखकुर। होगया दहतसे लरजाँ वह बशर कारवाँमें जाके दी उसने खबर। उसमें था मर्द तबीबे पुर हुनर॥

साथ लेकर उसको मीरे कारवाँ।

सुनतेही उस बातके आया वहाँ ॥

देखकर दुखतरकोउसने योंकहा। है यह सकते के मर्जमें सुबतला॥

कहके विसमिल्हाह नशतर को लिया।

उससे की झट पट रगे कफान वा ॥

जबकिनिकलाउसकेतनमेंसेलहू। होगयीहुशियारवहफर्बुन्दःसू ॥