कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंबोधसागर
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रिजकमें बाहँम किसीको लाशरीकँ ॥ देख आते मत किसीको सहँम जा । उसकी किंसमतका है साथ उसके धरा ॥ कहके यह और हँट वहाँसे जा रहे । सामने तकियाँके जा सुस्ता रहे ॥ शामको एक लोटा और दो रोटियाँ । तकियाँवालेको वहाँ पर उतरियाँ ॥ और उनके वास्ते खँवाने तआम । यक पुलाओंकी रिकाबी एक जाम ॥ जर्फ चीनी और उनपर ख्वाँन पोश । यक तकल्लुँफसे उनमें नाय नोश ॥ खाके इब्राहीमने पानी पिया । शुक्नेने आमतकाफिरकसिजदा किया ॥ यह तो ने अमत लेकबस चलते रहे । वह जो तकियादार थे जलते रहे ॥ शाम जब आयी वही फिर उतरियाँ । साथ यक लोटाके वा दो रोटिया ॥ मारे गुस्साके उन्होंने यों कहा । मैं नहीं खानेका खाना आपका ॥ एकको तुम भजो कुलियाँ और पुलाँओं । मुझको जौकी रोटियाँ रुखी खिलाओ ॥ जैसा वह दुवैश मैं दुवैश हूँ । जैसा वह दिलरेश मैं दिलरेश हूँ ॥ क्यों बढ़ायी एककी यह इज्वैशाँ । है फकीर आपसमें सब एकसा ॥