कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
Devanagarihipublished2,136 पृष्ठ
पृष्ठ 930, कुल 2136 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 930
( ६२ )
भवतारणबोध
जो चाहो सोई मिले, मानो मोर विचार । यही भेद जाने बिना, कोइ न उतरे पार ॥ भव भारी भर्मइ मिटै, संशय शूल न होय । हंसनमें जो रम रहा, शरण गहै नहिं कोय । कहै कबीर धर्मदास सों, छोड़ो तुम संसार ॥ यह मेरी परतीत कर, तारो कुल परिवार ॥ अंश वंश परिवार निज, नाद बिन्दु गुरु शिष्य । जो चाहे निह अक्षरहिं, मुक्ति अंक सोइ लिखव ॥
इति श्रीभवतारणबोध समाप्त